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अमेरिका का ISIS-खुरासान से बदला:काबुल धमाकों के मास्टरमाइंड को मार गिराया; पाकिस्तान बॉर्डर से लगे नंगरहार में ड्रोन से हमला किया

वॉशिंगटन3 महीने पहले

अमेरिका ने अफगानिस्तान में ISIS-खुरासान (ISIS-K) ग्रुप के ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया है। ये हमला अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में किया गया है, जो कि पाकिस्तानी सीमा से लगा हुआ है और ISIS का गढ़ माना जाता है। यहां अमेरिकी हमले में काबुल धमाकों का मास्टरमाइंड मारा गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के हेडक्वार्टर पेंटागन की तरफ से ये जानकारी दी गई है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन ने मध्य-पूर्व की किसी अज्ञात लोकेशन से बीती रात उड़ान भरी और ISIS-K के आतंकी को उस वक्त निशाना बनाया जब वह अपने दूसरे सहयोगी के साथ कार में सवार था, ये दोनों अमेरिकी हमले में मारे गए हैं।

न्यूज एजेंसी Asvaka के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन ने पूर्वी नंगरहार के कला-ए-नघरक जिले में हमला किया है। इसमें एक घर पूरी तरह तहस-नहस हो गया।
न्यूज एजेंसी Asvaka के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन ने पूर्वी नंगरहार के कला-ए-नघरक जिले में हमला किया है। इसमें एक घर पूरी तरह तहस-नहस हो गया।
घर के अंदर खड़ा एक ऑटो क्षतिग्रस्त हो गया और घर की दीवारों में जगह-जगह छेद हो गए।
घर के अंदर खड़ा एक ऑटो क्षतिग्रस्त हो गया और घर की दीवारों में जगह-जगह छेद हो गए।
ड्रोन से किए गए हमले में जमीन में एक गहरा गड्ढ़ा भी हो गया है, हालांकि अमेरिका का कहना है कि इस हमले में किसी आम नागरिक की जान नहीं गई है।
ड्रोन से किए गए हमले में जमीन में एक गहरा गड्ढ़ा भी हो गया है, हालांकि अमेरिका का कहना है कि इस हमले में किसी आम नागरिक की जान नहीं गई है।

काबुल धमाकों के बाद अमेरिका ने दी थी चेतावनी
गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर ISIS-K ने फिदायीन हमला किया था, इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 170 लोग मारे गए थे। इसके बाद अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि काबुल हमले का बदला लिया जाएगा और आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि काबुल एयरपोर्ट पर हमला करवाने वालों के बारे में जानते हैं और उन्हें सही समय और सही जगह पर करारा जवाब दिया जाएगा। इसके 36 घंटे के अंदर ही अमेरिका ने बीती रात ISIS-खुरासान ग्रुप के ठिकानों पर ड्रोन स्ट्राइक कर दी।

काबुल एयरपोर्ट पर फिर हमला कर सकता है ISIS
अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत के बीच काबुल एयरपोर्ट पर एक और आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे काबुल एयरपोर्ट से तुरंत हट जाएं, क्योंकि वहां ISIS फिर से हमला कर सकता है। अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी किए गए अलर्ट में काबुल एयरपोर्ट के अब्बे गेट, ईस्ट गेट और नॉर्थ गेट का खास तौर से जिक्र किया गया है। पूरी खबर पढ़ें...

क्या है ISIS-K?
ISIS-K का नाम उत्तरपूर्वी ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान में आने वाले इलाकों के नाम पर रखा गया है। यह संगठन सबसे पहले 2014 में पूर्वी अफगानिस्तान में सक्रिय हुआ था। इसने पिछले कुछ सालों पूर्वी अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। खासतौर से अफगानिस्तान के नंगरहार और कुनार प्रांतों में इसकी अच्छी पहुंच है। इस संगठन ने काबुल में स्लीपर सेल तैनात किए हैं, जिन्होंने 2016 से बड़ी संख्या में काबुल और उसके बाहर आत्मघाती हमले किए हैं। ISIS-K शुरुआती तौर पर सिर्फ पाकिस्तान से सटे कुछ इलाकों तक सीमित था, लेकिन अब यह जाज्वान और फरयाब समेत उत्तरी प्रांतों में भी दूसरा प्रमुख गुट बन गया है।

तालिबान का विरोधी है ISIS का खुरासान ग्रुप
ISIS और तालिबान दोनों ही कट्‌टर सुन्नी इस्लामिक आतंकी हैं, फिर भी दोनों एक दूसरे के विरोधी हैं। ISIS-K और तालिबान के बीच कई मुद्दों पर असहमति है। ISIS ने तालिबान पर आरोप लगाया है कि उसने जिहाद और युद्ध का मैदान छोड़कर दोहा और कतर के बड़े होटलों में बैठकर शांति के समझौते किए हैं।

काबुल धमाकों के पीछे ISIS-K का ये मकसद था
BBC की एक्सपर्ट मिना अल-लामी ने के मुताबिक काबुल ब्लास्ट के जरिए ISIS, तालिबान की इमेज खराब करना चाहता है। उसे चैलेंज करना चाहता है। इस हमले का सबसे हैरान करने वाला पहलू ये है कि अलर्ट मिलने के बावजूद इसे टाला नहीं जा सका। ये अमेरिका और तालिबान को ISIS-K का सीधा चैलेंज है।

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