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मसूद का मुद्दा / चीन को मनाने में जुटे अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन; तीनों इस बार निर्णायक लड़ाई के मूड में

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 11:57 AM IST


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  • चीन के न मानने पर सुरक्षा परिषद में वोटिंग भी कराई जा सकती है
  • मसूद के खिलाफ प्रस्ताव की भाषा में भी किया जा सकता है बदलाव

वॉशिंगटन. जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों की सूची में डालने के प्रयास में अड़ंगा लगा रहे चीन को समझाने की आखिरी कोशिश शुरू हो गई है। अगर वह नहीं मानता है तो तीनों महाशक्ति इस बार निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं। मसूद मामले पर सुरक्षा परिषद में ओपन वोटिंग भी कराई जा सकती है। हालांकि, अभी तीनों का प्रयास है कि चीन को कैसे भी मना लिया जाए। सूत्रों का कहना है कि चीन की मांग के मुताबिक मसूद के प्रस्ताव के भाषा में कुछ बदलाव भी किया जा सकता है। 
 

10 साल में चौथी बार चीन ने रोका प्रस्ताव

  1. 10 साल में चौथी बार है जब चीन ने इस प्रस्ताव को रोका है। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका अजहर के खिलाफ यह प्रस्ताव 27 फरवरी को लाए थे। इस पर आपत्ति की समय सीमा (बुधवार रात 12:30 बजे) खत्म होने से ठीक एक घंटे पहले चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया। 10 से अधिक देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

  2. चीन ने कहा कि वह बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है। इस पर अमेरिका ने चीन से अनुरोध किया था कि वह समझदारी से काम लें, क्योंकि भारत-पाक में शांति के लिए मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करना जरूरी है। 

  3. सुरक्षा परिषद में चीन का विरोध

    मसूद को बचाने में जुटे चीन को इस बार सुरक्षा परिषद में ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर सदस्य उसके रवैये से हैरान हैं। उनका सवाल है कि चीन आखिर आतंकी सरगना को बचाना क्यों चाहता है? सूत्रों का कहना है कि कुछ सदस्य देशों ने इस मुद्दे पर चीन से निजी तौर पर बात भी की है। 

  4. सुरक्षा परिषद के एक राजनयिक ने चीन के रवैये पर निराशा जताते हुए कहा कि अगर इस बार भी वह नहीं मानता है तो मसूद को वैश्विक आतंकी की सूची में डालने के लिए दूसरी रणनीति अपनाई जाएगी। 

  5. हालांकि, फिलहाल चीन के अनुरोध पर मसूद के प्रस्ताव की भाषा को कुछ बदला जा सकता है। चीन की आपत्ति आतंकी शब्द की परिभाषा को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने चीन को सुझाव भी भेजे हैं। 

  6. सूत्रों का कहना है कि मसूद मामले में चीन के रवैये में पहले से कुछ बदलाव है, लेकिन अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अभी भी आश्वस्त नहीं हैं कि चीन पूरी तरह से उनकी बात मानेगा। उनका कहना है कि इसी वजह से सुरक्षा परिषद में ओपन वोटिंग कराने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। 

  7. धैर्य के साथ सारे मामले पर नजर रख रहा है भारत

    सूत्रों का कहना है कि भारत धैर्य के साथ अजहर मामले पर नजर रख रहा है। उसे उम्मीद है कि अजहर का नाम वैश्विक आतंकियों की सूची में जरूर डाला जाएगा। सुरक्षा परिषद के 14 सदस्यों का समर्थन उसके साथ है। चीन पाकिस्तान में आर्थिक निवेश कर रहा है, यही वजह है कि वह अजहर मामले में लगातार उसका साथ दे रहा है। चीन को पता है कि पाकिस्तान में कुछ आतंकी संगठन उसके खिलाफ काम कर रहे हैं। 

  8. भारत जानता है कि पाकिस्तान में बहुत से भारतीय हैं। पाक उन लोगों को भारत के हवाले कर सकता है जो उसके यहां मोस्ट वांटेड माने जाते हैं। दाऊद इब्राहिम और सैय्यद सलाहुद्दीन ऐसे ही कुछ नाम हैं। अगर पाक समझता है कि भारत अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकता तो वह यह काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर सकता है।

  9. भारत ने अमेरिका के साथ भी हथियारों को लेकर अपनी चिंता साझा की है। अमेरिका ने इस बात के लिए उसकी सराहना भी की कि उसने सही समय पर बात उठाई। उधर, पाक के इस आरोप की पैरवी करने वाला अमेरिका में कोई नहीं है, जिसमें वह भारत को अपने लिए खतरा बताता है। 

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