अमेरिका / सीआईए के पूर्व एजेंट को 20 साल की जेल, चीन के लिए जासूसी करने का आरोप

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 12:01 PM IST


US intelligence community asked 20-year sentence to Ex-CIA agent
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US intelligence community asked 20-year sentence to Ex-CIA agent

  • 2017 में चीन गया था केविन मेलोरी, साढ़े 17 लाख रुपए में बेची थीं खुफिया जानकारियां
  • सीआईए के अधिकारियों पर पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप, एक अफसर को उम्रकैद की सजा हुई

वॉशिंगटन.  अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के एक पूर्व एजेंट को शुक्रवार को 20 साल जेल की सजा सुनाई गई। अमेरिका के खुफिया अफसरों ने कार्रवाई को ‘अलार्मिंग ट्रेंड’ बताया। 62 वर्षीय केविन मेलोरी को जासूसी कानून के तहत सजा सुनाई गई। मेलोर पर रक्षा सूचनाएं चीन के साथ साझा करने का आरोप था। दरअसल, केविन ने 2017 में शंघाई की यात्रा की थी। इस दौरान 25 हजार डॉलर (करीब साढ़े 17 लाख रुपए) के लिए उसने रक्षा से जुड़ी खास सूचनाएं चीनी अफसरों के साथ साझा की।

अमेरिकी सेना में काम करता था आरोपी

  1. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 5 मई 2017 को मेलोरी ने एक संदेश में चीनी एजेंट से कहा, ‘‘आपका उद्देश्य सूचना पाना है और मेरा पैसा कमाना।’’ अमेरिकी सेना का हिस्सा रह चुके केविन को स्टेट डिपार्टमेंट की सिक्योरिटी सर्विस में स्पेशल एजेंट बनाया गया था। बाद में वह सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी में ऑफिसर बना।

  2. हालांकि मेलोरी पहला अधिकारी नहीं है, जिसे जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले भूतपूर्व डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी अधिकारी रॉन हेन्सन को 15 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। उस पर भी चीन के साथ सूचनाएं साझा करने का आरोप था।

  3. अप्रैल में भूतपूर्व डिप्लोमेट सीएम क्लाइबोर्न को जांचकर्ताओं से झूठ बोलने का आरोपी माना गया था। उसने अमेरिकी दस्तावेज चीनी एजेंट को सौंपने के बदले में मिले पैसों को लेकर झूठ बोला था। 1 मई को भूतपूर्व सीआईए अधिकारी जैरी चुन शिंग ली को भी चीन के लिए जासूसी करने का आरोपी माना गया था।

  4. ली (54) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे जनवरी 2018 में गिरफ्तार किया गया। उस पर 2010-12 के दौरान बीजिंग के साथ सूचनाएं साझा करने का आरोप था। वह सीआईए नेटवर्क को चीन के मुकाबले कमजोर करने के लिए काम कर रहा था।

  5. मेलोरी केस में असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन डीमर्स ने कहा, ‘‘यह केस हमारे लिए एक तरह से अलार्म है। भूतपूर्व अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारियों को चीन के द्वारा इस तरह निशाना बनाया जा रहा है, ताकि वे अपने देश को धोखा दे सकें।’’

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