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अमेरिका / सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना बनाने के ट्रम्प के बयान से उलट रक्षा मंत्री बोले- ईरान से युद्ध नियमों के तहत ही होगा

ट्रम्प की सांस्कृति धरोहरों को निशाना बनाने की धमकी का अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी ने भी विरोध किया। ट्रम्प की सांस्कृति धरोहरों को निशाना बनाने की धमकी का अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी ने भी विरोध किया।
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ट्रम्प की सांस्कृति धरोहरों को निशाना बनाने की धमकी का अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी ने भी विरोध किया।ट्रम्प की सांस्कृति धरोहरों को निशाना बनाने की धमकी का अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी ने भी विरोध किया।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था- ईरान के 52 ठिकाने हमारे निशाने पर, इनमें सांस्कृति धरोहरें भी शामिल
  • उनके इस बयान पर संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने कहा- युद्ध में धरोहरों को निशाना नहीं बना सकते
  • अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले- हम युद्ध को कानून के तहत लड़ेंगे, सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना नहीं बना सकते

दैनिक भास्कर

Jan 07, 2020, 01:05 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरान ने हमले की कोशिश की, तो हमारे निशाने पर उसके 52 ठिकाने हैं। ट्रम्प ने कहा था कि इनमें कई ठिकाने इराकी और ईरानी संस्कृति के लिए बेहद अहम हैं। ट्रम्प के इस बयान पर संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने उनकी आलोचना की। अब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय- पेंटागन ने भी ट्रम्प की राय से दूरी बना ली है। अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने सोमवार को कहा कि कानून के तहत ही जंग लड़ेंगे। जब एस्पर से पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि वे सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना नहीं बनाएंगे, क्योंकि यह वॉर क्राइम है? इस पर एस्पर ने कहा- युद्ध का कानून तो यही कहता है। 

राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री के बीच बयानों का यह फर्क ऐसे समय में आया है, जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान की कुद्स सेना के जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया था। इसके बाद ईरान ने अमेरिका को बदला लेने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने कहा था कि ईरान ने अगर युद्ध छेड़ने की कोशिश की तो वे ईरान के 52 ठिकानों को निशाना बनाएंगे। इनमें सांस्कृतिक स्थल भी शामिल होंगे। 

पोम्पियो ने भी कही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई की बात

ट्रम्प के इस बयान की गंभीरता को विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी कम करने की कोशिश कर चुके हैं। पोम्पियो ने कहा था कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ही जवाब देगा। हालांकि, ट्रम्प ने इसे नजरअंदाज करते हुए एक और ट्वीट में कहा था-  “ईरान हमारे लोगों को मारने या टॉर्चर करने की कोशिश करता है, वह बम लगाकर हमारे लोगों को उड़ाता है और हम उनकी सांस्कृतिक धरोहरों को छू भी नहीं सकते। चीजें इस तरह तो नहीं चलतीं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून यही कहता है।” 

किस-किस ने की ट्रम्प के बयान की आलोचना? 
यूएन की सांस्कृति धरोहरों की देखरेख करने वाली संस्था ‘यूनेस्को’ के निदेशक ऑड्री अजूले ने कहा, “अमेरिका और ईरान दोनों ने 1954 और 1972 के कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों को युद्ध की स्थिति में प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करनी है। हालांकि, ट्रम्प ने 2018 में यूनेस्को पर इजराइल के साथ भेदभाव का आरोप लगाकर खुद को इन समझौतों से बाहर कर लिया था। 

अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प वॉर क्राइम करने की धमकी दे रहे हैं। यह ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ की तरह के ही बयान हैं। 

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