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बाइडेन-जिनपिंग मीटिंग:US प्रेसिडेंट बोले- दोनों देशों में टकराव से बचने के लिए सिस्टम बनाना जरूरी, ताइवान मुद्दे पर रहा फोकस

वॉशिंगटन2 महीने पहले
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अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर जारी तनाव के बीच सोमवार को जो बाइडेन ने शी जिनपिंग से वर्चुअल मीटिंग की। इस दौरान बाइडेन ने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि तनाव से टकराव पैदा होने की आशंका है और इससे बचने के लिए ‘गार्डरेल्स’ जैसा सिस्टम बनाने की जरूरत है। गार्डरेल्स का मतलब एक ऐसी व्यवस्था बनाने से है, जिससे अनचाहा संघर्ष टाला जा सके। सीढ़ियों या टूरिस्ट प्लेस पर मौजूद पहाड़ियों पर अकसर जो सिक्योरिटी रैलिंग लगाई जाती है, उसे गार्डरेल्स कहते हैं। इससे टूरिस्ट सुरक्षित रहते हैं यानी उनके नीचे गिरने का खतरा रहता है।

लंबी बातचीत
बाइडेन व्हाइट हाउस से जबकि जिनपिंग बीजिंग से इस वर्चुअल समिट में शामिल हुए। बाइडेन की डेस्क पर फॉरेन सेक्रेटरी ब्लिंकन भी मौजूद थे। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने मीटिंग के बाद कहा- दोनों नेताओं के बीच अच्छी बातचीत हुई। बाइडेन ने जिनपिंग से कहा- दोनों देशों के बीच कॉम्पटीशन है, लेकिन हमें टकराव से बचना होगा और इसके लिए गार्डरेल जैसा सिक्योरिटी सिस्टम बनाना होगा।

चीन ने ताइवान के एयर डिफेंस जोन में कई बार अपने फाइटर जेट्स भेजे हैं।
चीन ने ताइवान के एयर डिफेंस जोन में कई बार अपने फाइटर जेट्स भेजे हैं।

पुराने दोस्त और ताइवान का जिक्र
जिनपिंग ने बाइडेन को अपना पुराना दोस्त बताया। कहा- हम दोनों को मिलकर काम करने की जरूरत है। किसी तनाव या टकराव से बचने के लिए जरूरत है कि कम्युनिकेशन और कोऑपरेशन बना रहे। साउथ चाइना सी से लेकर ताइवान और ट्रेड से लेकर म्यांमार के मुद्दे तक दोनों देशों में तनाव है। बाइडेन और जिनपिंग की मीटिंग में इन पर सीधी बात तो नहीं हुई, लेकिन टकराव टालने पर बात हुई।

तीन घंटे से ज्यादा चली मीटिंग

चीन के अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के मुताबिक, बाइडेन और जिनपिंग की यह मीटिंग 3 घंटे 24 मिनट चली। वहीं, CNN के मुताबिक, दोनों नेताओं की इस मीटिंग में किसी भी मुद्दे पर किसी तरह की कोई सहमति नहीं बन सकी। इतना जरूर कहा जा सकता है कि टकराव टालने के मुद्दे दोनों नेता सहमत थे। इसके लिए मैकेनिज्म या सिस्टम बनाने पर भी विचार हुआ।

मीटिंग में शिनजियांग के उईगर मुस्लिम, तिब्बत और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकारों के मसले पर भी बातचीत हुई। चीन को यह मुद्दे परेशान करते रहे हैं। इसके अलावा साउथ चाइना सी, ताइवान और क्लाइमेट चेंज से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।

अमेरिका और कई देश चीन पर आरोप लगा रहे हैं कि वो कार्बन उत्सर्जन कम करने पर गंभीरता नहीं दिखा रहा। जिनपिंग COP26 क्लाइटमेट समिट में भी शामिल नहीं हुए थे।
अमेरिका और कई देश चीन पर आरोप लगा रहे हैं कि वो कार्बन उत्सर्जन कम करने पर गंभीरता नहीं दिखा रहा। जिनपिंग COP26 क्लाइटमेट समिट में भी शामिल नहीं हुए थे।

ताइवान पर तल्खी ज्यादा
चीन लगभग हर हफ्ते अपने फाइटर जेट्स ताइवान के एयरस्पेस में भेज रहा है। पिछले महीने एक ही बार में करीब 150 चीनी फाइटर जेट्स ताइवान के एयरस्पेस में घुस गए थे। इसके बाद अमेरिका ने दो टूक कहा था कि वो किसी भी कीमत पर ताइवान की हिफाजत करेगा। चीन इससे बौखला गया था। टकराव की आशंका के बीच बाइडेन और जिनपिंग की बातचीत से तनाव कम करने की उम्मीद की जा सकती है।

अक्टूबर में करीब पांच बार चीनी फाइटर जेट्स ने ताइवान के एयर डिफेंस जोन में उड़ान भरी। इसके बाद अमेरिका ने अपने वॉरशिप रोनाल्ड रीगन को ताइवान के करीब तैनात कर दिया। हिंद और प्रशांत महासागर में भी चीन को जवाब देने के भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया साथ आ चुके हैं।