खतरा टला नहीं है:अमेरिका ने कहा- अलकायदा से रिश्ते नहीं तोड़ सकता तालिबान, इससे दुनिया पर खतरा बढ़ेगा

वॉशिंगटन23 दिन पहले
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तालिबान और अलकायदा अफगानिस्तान में फिर एकजुट हो रहे हैं। (फाइल) - Dainik Bhaskar
तालिबान और अलकायदा अफगानिस्तान में फिर एकजुट हो रहे हैं। (फाइल)

अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी के बाद भी अमेरिका वहां के हालात पर पैनी नजर रख रहा है। ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले के मुताबिक, यूएस आर्मी की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान और अलकायदा एक दूसरे के साथ फिर जुड़ रहे हैं और इससे दुनिया के सामने फिर नया खतरा पैदा हो रहा है।

कुछ दिनों पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि अलकायदा बहुत तेजी से अफगानिस्तान में फिर पैर पसार रहा है और अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद यह संकट दोगुना हो जाएगा।

सीनेट के सामने पेश हुए मार्क
अफगानिस्तान में सैन्य कमान संभालने वाले तमाम अमेरिकी अफसर यूएस सीनेट की आर्म्ड फोर्सेस कमेटी के सामने पेश हो रहे हैं। मंगलवार को भी कुछ अफसर इस कमेटी के सामने पेश हुए। इनमें जनरल मार्क मिले भी शामिल हैं। सीनेट की कमेटी ने इन अफसरों से तीखे सवाल किए।

एक सवाल तालिबान और अलकायदा के रिश्तों को लेकर भी किया गया। इसके जवाब में जनरल मार्क ने कहा- तालिबान से यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि वो अलकायदा से रिश्ते नहीं रखेगा। तालिबान ने अलकायदा से अपने रिश्ते नहीं तोड़े हैं।

CIA के पास भी सबूत
अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के पास अलकायदा और तालिबान के बीच रिश्तों को लेकर पक्की खुफिया रिपोर्ट्स हैं। इनमें बताया गया है कि तालिबान के हुकूमत पर कब्जा करने के बाद अलकायदा ने तेजी से पैर पसारना शुरू किया है।

हालात कितने गंभीर होते जा रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने तालिबान को दी गई वॉर्निंग की जानकारी कमेटी के सामने पेशी के दौरान दी थी। ब्लिंकन ने कहा था- हमने तालिबान को साफ बता दिया है कि अगर अलकायदा की तरफ से अमेरिका के खिलाफ कोई हरकत होती है तो इसकी जिम्मेदारी तालिबान की होगी।
हालात का फायदा उठा रहा अलकायदा
सितंबर के शुरू में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और CIA चीफ सीनेट कमेटी के सामने पेश हुए थे। इस दौरान दोनों ने इस कमेटी को बताया था कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अलकायदा फिर एकजुट होने और संशाधन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ऑस्टिन के मुताबिक, तालिबान से दोहा में हुआ एग्रीमेंट अफगान सैनिकों की हार का सबसे बड़ा कारण था।

ऑस्टिन के मुताबिक, दोहा समझौते की वजह से अफगानिस्तान के सैनिकों का हौसला पस्त हो गया और इसका फायदा सीधे तौर पर तालिबान ने उठाया।

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