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विपक्ष के दबाव में श्रीलंका के PM का इस्तीफा:सरकार समर्थक-विरोधियों की हिंसा में सांसद समेत 4 की मौत, पूर्व मंत्री का घर जलाया

कोलंबो5 महीने पहले

दिवालिया होने की कगार पर खड़े श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने सोमवार को विपक्ष के दबाव में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राजधानी कोलंबो समेत देश के कई हिस्सों में सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच जबरदस्त हिंसा हुई। इसमें रूलिंग पार्टी के सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला और उनके सिक्योरिटी गार्ड की मौत हो गई। भीड़ ने पूर्व मंत्री जॉन्सटन फर्नांडो के माउंट लाविनिया इलाके में मौजूद आलीशान घर में भी आग लगा दी। उनके परिवार को बमुश्किल बचाया गया। एक सांसद सनथ निशांथा के घर भी आग लगाने की कोशिश की गई।

देश में इस तरह के टकराव का खतरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे प्रमुख शहरों में सेना तैनात कर सकते हैं। देर शाम मिली जानकारी के मुताबिक, हिंसा में अब तक कुल चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 119 लोग घायल हैं।

आगे क्या मुमकिन
पिछले हफ्ते प्रमुख विपक्षी नेता सिरिसेना ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। इसमें तय हो गया था कि प्रधानमंत्री महिंदा इस्तीफा देंगे। इसके बाद अंतरिम सरकार बनेगी। हालांकि अंतरिम सरकार बनने से पहले देश में अमन बहाली करनी होगी। सरकार में राजपक्षे परिवार का अब भी दबदबा है, लेकिन वो विपक्ष को साथ लेकर उसको भी नाकामियों का हिस्सेदार बनाना चाहते हैं। इसलिए अंतरिम सरकार जल्द बन सकती है। विपक्ष भी जानता है कि अगर देश को बचाना है तो इस वक्त सरकार और खासतौर पर राष्ट्रपति गोटबाया का साथ देना होगा।

चुनावी पोस्टर में अमरकीर्ति नजर आ रहे हैं। उनकी सोमवार को संदिग्ध मौत हो गई। मौत से पहले वो भीड़ से घिर गए थे। बचने के लिए फायरिंग की थी। (फाइल)
चुनावी पोस्टर में अमरकीर्ति नजर आ रहे हैं। उनकी सोमवार को संदिग्ध मौत हो गई। मौत से पहले वो भीड़ से घिर गए थे। बचने के लिए फायरिंग की थी। (फाइल)

हिंसा किसके इशारे पर
श्रीलंका के कई हिस्सों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें हैं। इससे भी बड़ा खतरा महिंदा के इस्तीफे से खड़ा हो गया है। दरअसल, उनके बड़े भाई और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे नहीं चाहते थे कि महिंदा इस्तीफा दें, लेकिन विपक्ष की मांग के आगे उन्हें झुकना पड़ा। दूसरी तरफ, उन्होंने अपने समर्थकों को सड़कों पर उतार दिया। अब राजपक्षे भाइयों के विरोधियों और समर्थकों के बीच देश के कई हिस्सों में झड़पें शुरू हो गई हैं।

कोलंबो में प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इस पुलिसकर्मी ने आंसू गैस के गोले दागे।
कोलंबो में प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इस पुलिसकर्मी ने आंसू गैस के गोले दागे।

सांसद की मौत कैसे हुई
श्रीलंकाई मीडिया के मुताबिक सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला अपनी कार में गनर और ड्राइवर के साथ निटामबुवा में एक रास्ते से गुजर रहे थे। उनकी कार पर रेड लाइट थी। इसी सड़क पर सैकड़ों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी मौजूद थे। इन लोगों ने सांसद की कार को घेर लिया और नारेबाजी की। सांसद गुस्से में बाहर निकले और पर्सनल पिस्टल से भीड़ पर फायरिंग कर दी। इसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद सांसद भागकर बगल की एक बिल्डिंग में छिप गए। कुछ देर बाद उनका शव वहीं से बरामद हुआ। अब तक यह साफ नहीं है कि सांसद भीड़ के हमले में मारे गए या मौत की वजह कुछ और है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भीड़ के हाथों मारे जाने से बचने के लिए सांसद ने अपनी पिस्टल से गोली मारकर खुदकुशी की है।

प्रदर्शन के दौरान सरकार के समर्थक और विरोधी आपस में भिड़ गए। इस दौरान सत्ताधारी पार्टी के सांसद की मौत हो गई।
प्रदर्शन के दौरान सरकार के समर्थक और विरोधी आपस में भिड़ गए। इस दौरान सत्ताधारी पार्टी के सांसद की मौत हो गई।

आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के हालात जानने के लिए दैनिक भास्कर ने अपने रिपोर्टर्स को वहां भेजा। स्पेशल रिपोर्ट्स पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक क्लिक करें...

एक महीने में 2 बार लगा आपातकाल
खराब आर्थिक हालात के मद्देनजर आम लोगों ने शुक्रवार को नेशनल असेंबली में हिंसक प्रदर्शन किए थे। इसके बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने फिर से इमरजेंसी लगाने की घोषणा की थी। श्रीलंका में एक महीने बाद दोबारा आपातकाल लगाया गया है। इसके पहले 1 अप्रैल को भी इमरजेंसी लगाई गई थी, जिसे 6 अप्रैल को हटा दिया गया था।

आर्थिक संकट की वजह से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर मार्च निकाल रहे हैं।
आर्थिक संकट की वजह से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर मार्च निकाल रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के घर और दफ्तर के बाहर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के घर और दफ्तर के बाहर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे।

बांग्लादेश ने 20 करोड़ डॉलर का लोन चुकाने के लिए दिया एक और साल
श्रीलंका 1948 में अपनी आजादी के बाद से सबसे बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है, जिससे वह जरूरी चीजों का आयात नहीं कर पा रहा है। इसे देखते हुए बांग्लादेश ने करेंसी स्वैप के माध्यम से दिए गए 20 करोड़ डॉलर के लोन को चुकाने की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है।

बांग्लादेश बैंक के डायरेक्टर्स ने एक बैठक में यह फैसला किया। डेली मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक के प्रवक्ता सेराजुल इस्लाम ने कहा कि लोन की शर्तों को बदले बिना ही इसे बढ़ाया गया है। वहीं, सरकार के खिलाफ लोगों का विरोध जारी है।

2021 में बांग्लादेश ने दिया था लोन
बांग्लादेश ने करेंसी स्वैप (मुद्रा विनिमय) समझौते के तहत श्रीलंका को 200 मिलियन डॉलर की सहायता मई 2021 में दी थी। श्रीलंका को लोन 3 महीने में चुकाना था, लेकिन फिर श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। इसके बाद बांग्लादेश ने लोन चुकाने की अवधि बढ़ा दी है।

मानवीय सहायता भेज रहा बांग्लादेश

बांग्लादेशी विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और स्वास्थ्य मंत्री जाहिद मालेक ने बांग्लादेश में श्रीलंका के उच्चायुक्त सुदर्शन डीएस सेनेविरत्ने को दवाओं के बॉक्स दिए।
बांग्लादेशी विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और स्वास्थ्य मंत्री जाहिद मालेक ने बांग्लादेश में श्रीलंका के उच्चायुक्त सुदर्शन डीएस सेनेविरत्ने को दवाओं के बॉक्स दिए।

बांग्लादेश ने हाल ही में श्रीलंका को इमरजेंसी मेडिकल सप्लाईज भेजी थीं। स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित एक टोकन हैंडओवर समारोह में बांग्लादेशी विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और स्वास्थ्य मंत्री जाहिद मालेक ने बांग्लादेश में श्रीलंका के उच्चायुक्त सुदर्शन डीएस सेनेविरत्ने को दवाओं के बॉक्स दिए थे। मोमेन ने दवा की आपूर्ति को बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच एकजुटता और दोस्ती की अभिव्यक्ति बताया। इस बीच, सेनेविरत्ने ने कहा कि श्रीलंका बांग्लादेश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को महत्व देता है और इसे और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस दौरान बांग्लादेश की एसेंशियल ड्रग्स कंपनी लिमिटेड और बांग्लादेश एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्रीज ने मिलकर करीब 10 करोड़ की दवाएं श्रीलंका को सौंपी थीं।