जिस एवरेस्ट पर सब चढ़ाई करना चाहते हैं, वहां मैं सीधे लैंड करती हूं: प्रिया

3 वर्ष पहले
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  • प्रिया अधिकारी नेपाल की इकलौती फीमेल रेस्क्यू पायलट हैं, वह एवरेस्ट की 8000 मीटर ऊंची दुर्गम चोटियों पर फंसे लोगों को निकालती हैं 
  • प्रिया कहती हैं कि मैं दुनिया की सबसे बूढ़ी पायलट बनना चाहती हूं, 60 की उम्र में चॉपर उड़ाऊंगी

काठमांडू. 31 साल की प्रिया अधिकारी नेपाल की इकलौती फीमेल रेस्क्यू पायलट हैं। प्रिया एवरेस्ट की 8000 मीटर ऊंची चोटियों के ऊपर हेलीकॉप्टर उड़ाकर लोगों की जान बचाती हैं और मदद करती हैं। प्रिया डॉक्टर बनना चाहती थीं, पर एक मुलाकात ने उन्हें पायलट बनने के लिए प्रेरित किया। रेस्क्यू पायलट की जिस ड्यूटी को आधी से ज्यादा लड़कियां छोड़कर भाग जाती हैं, वहां प्रिया फिलहाल 30 पुरुषों में अकेली महिला हैं। वह 9 साल में 1000 से ज्यादा लोगों को एवरेस्ट की खतरनाक पहाड़ियों और इलाकों से रेस्क्यू कर चुकी हैं। प्रिया अधिकारी से उनकी अब तक की उड़ान के बारे में उपमिता वाजपेयी ने बातचीत की...

 

 

सवाल : मेडिकल की पढ़ाई से पायलट बनने का सफर कैसा रहा?
जबाव : हाईस्कूल की पढ़ाई के बाद मैं मेडिकल में एडमिशन लेने भारत (आंध्र प्रदेश) आ गई थी। अभी एडमिशन की प्रक्रिया चल ही रही थी कि घर से फोन आया कि मां की तबियत खराब है और मुझे लौटना पड़ा। मां ठीक हुईं तो मैं काठमांडू में ही बुद्धा एयरलाइंस में कैबिन क्रू की नौकरी करने लगी। फिर बीएससी किया और एमबीए भी। एक दिन किसी पार्टी में मेरे भाई ने मुझे अपने दोस्त से मिलवाया जो हेलीकॉप्टर पायलट था। उन्होंने मुझे अपने साथ फ्लाइंग पर ले जाने को कहा, मैं तैयार हो गई। ये मेरी पहली हेलीकॉप्टर राइड थी। घर आकर मैंने मां से कहा लोन लूंगी, पर बनूंगी तो पायलट ही। पहली राइड के 4 महीने बाद मैं खुद हेलीकॉप्टर उड़ा रही थी। 

 

सवाल : अकेली लड़की, जंगल, पहाड़ और बियाबान में कैसे फ्लाइंग कर पाती हैं, किसी ने कुछ कहा नहीं?
जबाव : मैं लड़की हूं इसलिए ये काम नहीं कर पाऊंगी, ऐसा मेरे जहन में कभी नहीं आया। हां, खुद की सुरक्षा के लिए मैंने बॉक्सिंग सीखना शुरू किया। 5 साल से जब भी काठमांडू में होती हूं सुबह एक-डेढ़ घंटा बॉक्सिंग जरूर करती हूं। रोज योग भी करती हूं। मेरी जेब में हमेशा एक चाकू भी रहता है। जिसकी वैसे आजतक जरूरत नहीं पड़ी। वैसे मेरा उसूल है, मैं नशे में धुत्त किसी पैसेंजर को चॉपर में चढ़ने तक नहीं देती हूं।

 

सवाल : एवरेस्ट की इकलौती फीमेल रेस्क्यू पायलट, आखिर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को कैसे देखती है?
जबाव : एवरेस्ट पर जाना बच्चों का खेल नहीं है। लेकिन मैं कई बार ऐसे क्लाइंबर्स से मिलती हूं जो बिना सोचे समझे यहां आ जाते हैं। मैं खुद कभी ये चढ़ाई नहीं करना चाहती। पर मुझे खुशी है कि जहां सब चढ़ाई करना चाहते हैं, वहां मैं सीधे लैंड करती हूं।

 

सवाल : ऐसा कोई मिशन जब बड़ी चुनौती का सामना किया?
जबाव : एक बार 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बेस था। वहां 500 किलो सामान पहुंचाना था। सामान ऑफलोड करने के लिए कोई क्रू भी नहीं था। यानी पायलट भी मैं और सामान चढ़ाना और उतारना भी मेरे ही जिम्मे। फिर 2015 में जब नेपाल में भूकंप आया तो 3 महीनों तक रोज 10-10 सॉर्टीज लगाईं।

 

सवाल : नेपाल में भूकंप के वक्त ऑपरेशन कितना मुश्किल था?
जबाव : भूकंप के दूसरे दिन पहली रेस्क्यू लैंडिंग जिस जगह की वहां अचानक 100 लोगों की भीड़ चॉपर में घुसने लगी। सड़कें बंद थीं, लोग रास्तों में फंस गए थे। मैंने पहले बुजुर्गों, बच्चों को रेस्क्यू किया। बाकी लोगों से कहा कि आप घरवालों के नंबर मुझे लिखकर दे दो। काठमांडू लौटकर मैंने हर एक के घरवालों को फोन कर बताया कि उनके अपने सुरक्षित हैं।  

 

सवाल : रेस्क्यू और टूरिज्म फ्लाय में क्या फर्क महसूस करती हैं?
जबाव : फ्लाइट टूरिज्म के लिए हो तो मौसम खराब होने पर उड़ान नहीं भरते। रेस्क्यू के लिए मौसम को नजरअंदाज करना होता है। ध्यान, बस फंसे व्यक्ति को बाहर निकालने पर होता है। पर मुश्किल तब होती है, जब किन्हीं वजहों से आप बीमार को अस्पताल नहीं पहुंचा पाते और वह आपके सामने चॉपर में ही दम तोड़ देता है।

 

सवाल : आपने एक बार ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भी हिस्सा लिया है?
जबाव : हां, कैबिन क्रू रहते मैं एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट में गई थी। हम 5 बहनें हैं। मां चाहती थीं, एक बेटी तो ब्यूटी क्वीन जरूर बने। बाकी चारों नहीं गईं तो मुझे जाना पड़ा। पर कॉन्टेस्ट 2 माह में ही निरस्त हो गया।

 

सवाल : तो अब आगे आपका फ्यूचर प्लान क्या है?
जबाव : मैं दुनिया की सबसे बूढ़ी पायलट बनना चाहती हूं। 60 की उम्र में भी चॉपर उड़ाना चाहती हूं। फिलहाल स्लिंग ऑपरेशन की ट्रेनिंग लेने का प्लान है, जिसमें उड़ान के दौरान ही रस्सी से सामान और लोगों को उतारा जाता है।

 

सवाल : आपका कोई इंस्पिरेशन है?
जबाव : मुझे नहीं लगता कोई किसी को इंस्पायर कर सकता है। आपको खुद सब करना होता है। मैंने सोच लिया था कि पायलट बनकर ही रहूंगी। वैसे जिस तरह प्रियंका चोपड़ा ने जिंदगी, शादी, करिअर, कंट्रोवर्सी को हैंडल किया है, मैं भी वैसे ही खुद को रखना चाहती हूं।

 

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