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  • With The Challenges Faced During The Pandemic, These Mothers Found A New Way; Changed Home, City And Job To Fulfill Dreams

द न्यू यार्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत:महामारी के दौर में मिली चुनौतियों से इन मदर्स ने तलाशी नई राह; घर, शहर व नौकरी बदल सपने पूरे करने में जुटीं

3 महीने पहलेलेखक: जेसिका ग्रोस
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जीवन साथी के अलग होने पर भी हताश नहीं हुईं ये महिलाएं। - Dainik Bhaskar
जीवन साथी के अलग होने पर भी हताश नहीं हुईं ये महिलाएं।

अमेरिका के ओरेगॉन सिटी की सारा शेफर्ड ने महामारी फैलने के बाद परिवार समेत 19 फुट लंबी वैन में रहने का ‌फैसला लिया था। उन्होंने पिछले साल अगस्त में फुल टाइम जॉब छोड़कर फ्रीलांसिंग शुरू कर दी। शेफर्ड अकेली नहीं हैं, महमारी के दौर में कई महिलाओं मानसिक और आर्थिक समस्याओं से जूझ रही महिलाओं खासकर माओं ने जिंदगी को नया अर्थ देने की कोशिश की। उन्होंने नापसंद जॉब छोड़ना और देश या दुनिया के सफर पर निकलना जैसे कठिन फैसले लिए। पढ़िए कुछ की कहानियां...

अंत भला तो सब भला

33 साल की सारा शेफर्ड बताती हैं कि 7 साल की बेटी, नवजात और दो पेट्स को लेकर वे वैन के सफर पर निकल पड़े। जगह तंग थी पर सबके साथ समय खुशी से बीतता रहा। जूम कॉल में समस्या, बच्चे को सुलाने की दिक्कत के चलते सारा का यह अभियान तीन महीने ही चला। वॉशिंगटन के लॉन्ग बीच पर उनकी गाड़ी खराब हो गई। उन्होंने वहीं बसने का फैसला लिया।

सब अच्छा हो जरूरी नहीं

कैंसर को मात दे चुकीं 56 साल की लीजा रिपर बताती हैं बीते फरवरी में उन्होंने 5 माह पुरानी नौकरी छोड़ दी ताकि पति व बेटी पर ध्यान दे सकें। नोटिस देने के दो हफ्ते बाद ही पिता चल बसे। दिसंबर में पूरे परिवार को कोरोना हो गया। फिर पेट डॉग की मौत हो गई। 200 से ज्यादा रिज्यूमे भेजे, 50 इंटरव्यू दिए तब उन्हें कॉलेज में नौकरी मिली। मां-बेटी बताती हैं इससे सीख मिली कि सब अच्छा हो जरूरी नहीं। अब टैडी (नया डॉग) परिवार का उत्साह बढ़ा रहा है।

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