पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करें
मैक्सिको सिटी. राजधानी मैक्सिको सिटी के ज्यादातर इलाकों में सोमवार को वातावरण शांत था। ट्रैफिक से भरा रहने वाला शहर सूना पड़ा था। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, बाजारों से महिलाएं गायब थीं। देश थम सा गया था। लेकिन इसकी वजह कोरोनावायरस नहीं, बल्कि वे महिलाएं थीं, जो हिंसा के खिलाफ हड़ताल पर थीं। हर तरफ सिर्फ पुरुष नजर आ रहे थे। महिलाओं के बिना खाली पड़ी जगहों की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर की डेली प्रेस ब्रीफिंग में भी कुर्सियां खाली थीं।
महिला पत्रकारों ने इसका बहिष्कार किया था। महिलाओं ने अपराधियों के खिलाफ सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए पूछा- देख लीजिए, हमारे बिना दुनिया कैसी हो जाएगी, इसका अंदाजा लगा लीजिए। मैक्सिको में रोज 10 महिलाओं को मार दिया जाता है। ऐसा ही चलता रहा, तो वे हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। एक्टिविस्ट लोरना वोल्फर ने कहा- एक ऐसे देश में रहना अब संभव नहीं है, जहां किसी महिला की निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती है, वह भी बिना किसी गुनाह के।
हड़ताल से एक दिन में 9,700 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान
मैक्सिको में जनवरी 2019 से सितंबर तक 2,833 महिलाओं की हत्या हुई थी। हिंसा के खिलाफ महिलाओं की हड़ताल का खामियाजा अर्थव्यवस्था को भी भुगतना पड़ा। बिजनेस ग्रुप कॉन्सानको सर्वितुर के मुताबिक हड़ताल से देश को महज एक दिन में करीब 9721 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा होगा।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.