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तालिबान अब ड्रग्स का आतंक मचाएगा:अफगानिस्तान को दुनिया से मिलने वाली आर्थिक मदद रुकने लगी, अब ड्रग्स नेटवर्क बढ़ने का खतरा

एक वर्ष पहलेलेखक: वॉशिंगटन से भास्कर के लिए वैंडा फैलबॉब ब्राउन

अफगानिस्तान अब तालिबान के कब्जे में है। इसे देखते हुए अफगानिस्तान को दुनियाभर से मिलने वाली 7.43 लाख करोड़ रु. की मदद बंद होने वाली है। अमेरिका ने अफगानिस्तान का 70,300 करोड़ रु. का रिजर्व फंड फ्रीज कर दिया है। IMF ने भी 3,450 करोड़ रुपए का आपातकालीन रिजर्व फंड फ्रीज कर दिया है। अगले कुछ दिनों में दूसरे देश भी मदद बंद कर देंगे। फिर तालिबान खर्च चलाने के लिए क्या करेगा?

इसके जवाब से ही दुनिया डर रही है, क्योंकि इसका सीधा सा जवाब है- तालिबान अब ड्रग्स का इंटरनेशनल नेटवर्क और मजबूत करेगा। अफीम को ड्रग्स में बदलकर यूरोप, अमेरिका और भारत समेत सभी एशियाई देश में बेचकर पहले से ज्यादा पैसे कमाएगा। तालिबान के नेटवर्क से जुड़े 6 लाख से ज्यादा लोग सिर्फ अफीम की खेती पर निर्भर हैं।

2001 में अमेरिकी सेनाएं जब अफगानिस्तान में उतरी थीं, तब से अब तक तालिबान का ड्रग्स नेटवर्क कमजोर होने के बजाय मजबूत हुआ है। अब अफगानिसेतान में अफीम की खेती और पाकिस्तान की मदद से ड्रग्स का धंधा बढ़ता जाएगा, क्योंकि अभी वहां रोजगार की कोई उम्मीद ही नहीं है।

तालिबान ड्रग्स क्यों बेच रहा है?
ड्रग्स के व्यापार से ही तालिबान के 80 हजार लड़ाकों की फंडिंग होती है। नाटो की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में तालिबान ने ड्रग्स से 11 हजार करोड़ रु. कमाए। 2001 में अफीम का उत्पादन 180 टन था, जो 2007 में बढ़कर 8,000 टन हो गया। तब अफगानिस्तान की GDP में अफीम के अवैध धंधे का हिस्सा 60% था। अफगानिस्तान में दुनिया की सबसे नशीली अफीम उगती है। यही अफीम दुनियाभर में प्रॉसेस्ड ड्रग्स, यानी हेरोइन के रूप में पहुंचती है, जो मूल अफीम से 1500 गुना ज्यादा नशीली है।

इस धंधे में कौन-कौन मददगार हैं?
सबसे बड़ा मददगार पाकिस्तान है। अफगानिस्तान की 70% हेरोइन पाकिस्तान से होकर ही दुनिया के दूसरे देशों में पहुंचती है। ड्रग्स के मोलभाव का केंद्र दुबई में है। फरवरी 2021 में अमेरिकी एजेंसियों ने अफगान सरकार को यह भी बताया था कि 300 अफगानी नागरिक 5 अलग-अलग संस्थाओं के जरिए ब्रिटेन से पूरे ड्रग्स नेटवर्क को कंट्रोल कर रहे हैं। पहले यूरोप के अलग-अलग देशों से करते थे, लेकिन अभी तक इनका कोई पता नहीं चला है।

पैसे तालिबान तक कैसे पहुंचते हैं?
तालिबान ने पाकिस्तान के अलावा UAE, चीन, वर्जिन आइलैंड, लातविया, हांगकांग और तुर्की में नया नेटवर्क खड़ा कर दिया है। ऑर्गेनाइज्ड इंटरनेशनल क्राइम पर ब्रिटिश सरकार की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तालिबान का सारा पैसा अब इन्हीं देशों में कलेक्ट किया जा रहा है।

अफगानिस्तान की ड्रग्स कहां-कहां जाती है?
चीन, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन, स्पेन, कोलंबिया, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाली ड्रग्स अफगानिस्तान से आती है। भारत में भी अफगानिस्तान से हेरोइन आ रही है।

तालिबान तस्करी बंद क्यों नहीं करेगा?
लोगों के पास जब तक रोजगार के दूसरे साधन नहीं होंगे, वे अफीम उगाकर ही तालिबान को बेचते रहेंगे। रोजगार पैदा करने का तालिबान को कोई अनुभव ही नहीं है। जिस धंधे के दम पर वह सत्ता पर काबिज हुआ है, जाहिर है कि अब उसे और बढ़ाएगा। दुनियाभर से आर्थिक मदद बंद होने के बाद उसके पास कमाई का सिर्फ यही एक रास्ता बचता है।

चीन की निगाह 75 लाख करोड़ रु. की खनिज संपदा पर
अफगानिस्तान की जमीन में 75 लाख करोड़ रुपए (1 लाख करोड़ डॉलर) की खनिज संपदा है। यहां दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कॉपर खदान भी है। चीन यहां कॉपर की खुदाई की जुगत में है। चीन की दो कंपनियों ने 2008 में खदानें 30 साल की लीज पर ले ली थीं, लेकिन इन्हें अफगान सरकार ने अब तक शुरू नहीं होने दिया था।

अब तालिबान के सत्ता में आने के बाद चीन खदानों में काम शुरू करने की तैयारी में है। यहां 55 लाख मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता का कॉपर है। कोरोना काल में दुनिया में कॉपर की मांग 43% बढ़ चुकी है। इसलिए पाकिस्तान भी चीन के साथ खदान चाहता है।

(वॉशिंगटन से भास्कर के लिए वैंडा फैलबॉब ब्राउन नारकोटिक्स एक्सपर्ट, इनिशिएटिव ऑफ नॉनस्टेट आर्म्ड एक्टर्स, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट)

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