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भास्कर एक्सप्लेनर:बच्चों के लिए दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन कनाडा में मंजूर, अमेरिका में फैसला अगले हफ्ते

एक महीने पहले
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फाइजर की वैक्सीन बच्चों पर 100% प्रभावी। - Dainik Bhaskar
फाइजर की वैक्सीन बच्चों पर 100% प्रभावी।
  • जानिए, बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन को लेकर दुनिया में क्या चल रहा है

कनाडा ने 12-15 साल तक के बच्चों के लिए फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। बच्चों के लिए मंजूरी पाने वाली यह दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन है। इससे पहले यह वैक्सीन 16 से ज्यादा उम्र वालों को लगाई जा रही थी। अमेरिका में भी इसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में जानिए, कि बच्चों की वैक्सीन पर दुनिया में क्या हो रहा है-
कनाडा में फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी मिली है, अब आगे क्या होगा?
कनाडा में यह वैक्सीन 12-15 साल तक के बच्चों को लगाई जाएगी। इससे पहले कंपनी ने अमेरिका में इसकी इजाजत मांगी थी। अगले हफ्ते यूएसएफडीए की बैठक में इस पर फैसला होना है। मंजूरी के बाद सीडीसी की बैठक में तय होगा कि वैक्सीन को बच्चों को कैसे और कब लगेगी। वहीं, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में भी 12-15 साल के बच्चों के लिए फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी मिल सकती है।
यह वैक्सीन बच्चों पर कितनी प्रभावी है?
फाइजर का दावा है कि उसने 12-15 साल के 2,260 बच्चों पर ट्रायल किए। यह वैक्सीन इस आयु समूह पर 100% प्रभावी साबित हुई है। यानी जिन्हें यह वैक्सीन लगी, उनमें से कोई भी वायरस से संक्रमित नहीं हुआ। कंपनी ने कहा है कि अब उसका फोकस 6 माह से 11 साल तक के बच्चों के ट्रायल्स पर होगा।
बच्चों की कोरोना वैक्सीन पर दुनिया में कहां क्या हो रहा है?
अमेरिका में फाइजर के अलावा मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के भी बच्चों में ट्रायल्स किए जा रहे हैं। फाइजर ने मार्च में 6 माह से 11 साल तक के बच्चों पर ट्रायल्स शुरू किए। इनके शुरुआती नतीजे सितंबर तक आएंगे। ट्रायल के तीन चरण में 6 माह से 2 साल, 2-5 साल और 5-11 साल तक के बच्चे होंगे। पहले 5 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए डोज तय होगा, उसके बाद कम उम्र के बच्चों के लिए डोज तय किया जाएगा।

  • अमेरिका में मॉडर्ना की वैक्सीन के ट्रायल्स के नतीजे जून में आने की उम्मीद है। जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के नतीजे बाद में आएंगे। साल के अंत तक दोनों ही वैक्सीन बच्चों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं।
  • अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स भी 12-17 साल के 3,000 बच्चों पर ट्रायल कर रही है। इसकी वैक्सीन को अब तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। इसमें शामिल बच्चों की दो साल तक निगरानी की जाएगी।