रूस / जिस भालू के हमले में एक पैर खोना पड़ा, रशियन जू कीपर उसी को बचा रही हैं



भालू के साथ जू कीपर बेरा बिलिश। भालू के साथ जू कीपर बेरा बिलिश।
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भालू के साथ जू कीपर बेरा बिलिश।भालू के साथ जू कीपर बेरा बिलिश।

  • उजुरिस्क शहर के एक जू में ट्रेनिंग के वक्त जू कीपर वेरा बिलिश भालू के पिंजरे के पास गिर गईं थीं 
  • वे कहती हैं कि मेरे साथ जो हादसा हुआ, उसके लिए भालू  को सजा देना ठीक नहीं 

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 12:38 PM IST

मास्को. रूस के उजुरिस्क शहर के एक जू में पिछले दिनों एक मादा भालू ने एक कर्मचारी पर हमला कर दिया, जिसके बाद उसका पैर काटना पड़ा। जू प्रबंधन भालू को वहां से भेजने को तैयार है, लेकिन पीड़ित कर्मचारी वेरा बिलिश ऐसा नहीं चाहती हैं। बिलिश का कहना है कि उनके साथ एक हादसा हुआ था, जिसके लिए भालू मानयुना को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। 

 

अक्सर ऐसा होता है कि जू में जंगली जानवर के हमले करने के बाद उसे बाहर जंगल भेज दिया जाता है। बिलिश ने इसी डर की वजह से प्रबंधन से इसे जू में ही रखने की अपील की। दरअसल, जू कीपर वेरा पिछले दिनों एक युवक को भालुओं की देखभाल करना सिखा रही थीं तभी गलती से उनका पैर फिसल गया। वे मानयुना के पिंजरा के पास जा गिरीं। इससे पहले कि वे कुछ समझ पातीं, मानयुना ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें उन्हें कई फ्रेक्चर भी हुए और पैर काटना पड़ा।

 

होश में आते ही पूछा- मानयुना कैसी है?
सर्जरी के बाद जैसे ही बिलिश वेरा उठीं, उनका पहला सवाल यही था कि मानयुना कहा हैं। उसे जंगल में न छोड़ा जाए। वेरा की यह बातें सुनकर अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर भी हैरान थे कि जिस जानवर ने हमला करके चलने-फिरने से भी लाचार कर दिया, उसकी इतनी फिक्र वेरा को क्यों है। 

 

25 साल से जू में काम कर रही हैं वेरा
उन्होंने बताया, मैं पिछले 25 सालों से जू में काम कर रही हूं। मैं यकीन के साथ कह सकती हूं कि मुझ पर जो हमला हुआ, उसमें मानयुना का कोई कसूर नहीं। वह आक्रामक है ही नहीं। उस दिन मुझे ही ध्यान रखकर मानयुना की ओर जाना चाहिए था। जानवर तब तक किसी पर हमला नहीं करते जब तक उन्हें कोई तंग न करे। हो सकता है कि उस दिन मानयुना शांत मूड में हो और अचानक से मेरे उसके पास जाने से परेशान होने पर उसने हमला कर दिया हो। 

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