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अमेरिकी शिकस्त पर वर्ल्ड मीडिया:हार का सीधा असर जो बाइडेन की छवि पर; कैसे याद रखे जाएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति, अफगानिस्तान में हार, घर में जमीन खोने का डर

काबुल/वॉशिंगटन5 महीने पहले

अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपना आखिरी सैनिक भी वापस बुला लिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन का ये फैसला सवालों में घिर गया है। वर्ल्ड मीडिया के साथ अमेरिकी मीडिया भी इसे बाइडेन की भारी भूल मान रहा है। CNN ने लिखा है कि अफगान की लड़ाई तो खत्म हो गई है, लेकिन बाइडेन के लिए ये विरासत की जंग की शुरुआत है। ABC न्यूज ने लिखा कि बाइडेन ने अफगानिस्तान में अपनी जमीन खो दी है और सेनाओं को वापस बुलाने का फैसला बड़ी गलती साबित हो सकती है। अमेरिकी सेनाओं की अफगानिस्तान की वापसी पर मीडिया ने क्या कहा, पढ़िए...

न्यूयॉर्क टाइम्स: अमेरिका की सबसे लंबी जंग का बिना जश्न अंत
अमेरिका की सबसे लंबी जंग का बिना जश्न के अंत हो गया। काबुल की इकलौती एयरस्ट्रिप पर अब कबाड़ ही बचा है। एयरपोर्ट के बाहर अफगानियों की भीड़ है, जो अभी भी उम्मीद में हैं कि मुल्क से बाहर निकल पाएंगे। हल्की रोशनी में अमेरिकी सैनिकों ने तालिबानी लड़ाकों से हाथ मिलाया और इसी के साथ काबुल एयरपोर्ट पर तालिबानी कब्जा हो गया।

CNN: बाइडेन की विरासत की जंग शुरू
बाइडेन इस बात का दावा कर सकते हैं कि उन्होंने लंबे समय से चली आ रही जंग को खत्म कर दिया, लेकिन उन्होंने आलोचकों के लिए भी रास्ता खोल दिया है। अफगानिस्तान की लंबे समय से चली आ रही जंग तो खत्म हो गई है, लेकिन बाइडेन के लिए ये विरासत की जंग की महज शुरुआत ही है। अब उनके नियंत्रण के बाहर हो रही घटनाओं के चलते ये विरासत खतरे में पड़ सकती है। अगले महीने जब बाइडेन अमेरिका में अलकायदा के हमले की 20वीं बरसी मना रहे होंगे, तो इस आतंकी संगठन को पनाह देने वाला तालिबान अफगानिस्तान पर अपने कब्जे का जश्न मना रहा होगा।

वॉल स्ट्रीट जर्नल: अमेरिकी फौजों ने 20 साल बाद अफगानिस्तान छोड़ा
अमेरिकी सेना का C-17 विमान आखिरी अमेरिकी सैनिकों की टुकड़ी को लेकर अफगानिस्तान से रवाना हो गया। इसी के साथ अमेरिकी इतिहास की सबसे लंबी जंग की आधिकारिक समाप्ति की घोषणा भी हो गई, लेकिन वहां फंसे करीब 200 अमेरिकियों और हजारों अमेरिकी सहयोगियों के सामने भविष्य की अनिश्चितता और सुरक्षा का खतरा खड़ा हो गया है।

ABC न्यूज: अपनों को ही समझाने में नाकाम रहे बाइडेन
राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। बाइडेन अपनी ही पार्टी के मेंबर्स को ये समझाने में नाकाम रहे हैं कि वो सही रास्ते पर हैं। एक गैर सामान्य फैक्ट ये भी है कि अफगानिस्तान से सेनाओं को वापस बुलाने का फैसला बड़ी भूल साबित हो सकता है। 86 फीसदी डेमोक्रेट मानते हैं कि सभी अमेरिकियों के लौटने तक फौजों को वहीं रहना चाहिए। रिपब्लिकन की संख्या 87 फीसदी है। अफगानिस्तान में सुसाइड अटैक के बाद कराए गए एक पोल में ये बात सामने आई है।

द गार्जियन: अमेरिका की वापसी, तालिबानी अफगान में नए युग की शुरुआत
आखिरकार अफगानिस्तान से अमेरिकी से फौजें लौट आईं। इसी के साथ अफगानिस्तान में तालिबान के शासन में नए युग की शुरुआत हुई है। ब्रिटेन के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ लॉर्ड डेविड रिचर्ड्स ने अफगानिस्तान में अमेरिकी और ब्रिटिश कदमों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बहुत सारी जानें गईं। केवल सैनिक नहीं बहुत सारे अफगानी भी मारे गए। अब हजारों अफगानिस्तानी नागरिक उम्मीद भी खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीनों में बाइडेन की लीडरशिप ने उन अफगानिस्तानी लोगों को हताश किया और साथ ही हमें भी।

रॉयटर्स: अफगानिस्तान से वापसी के बाद बाइडेन के नंबर घटे
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक पोल कराया। इसमें केवल 40% अमेरिकियों ने ही अफगानिस्तान से सेनाएं वापस बुलाए जाने के बाइडेन के कदम को सही ठहराया है। तीन चौथाई अमेरिकियों का मानना है कि अमेरिकी फौजों को तब तक वहां रहना था, जब तक हर अमेरिकी नागरिक वहां से वापस नहीं आ जाता। 51% लोगों ने बाइडेन के फौजें बुलाने के फैसले को गलत ठहराया है।

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