अफगानिस्तान से स्पेशल: टायर की दुकान चलाने वाले का बेटा गन कल्चर से लड़कर कैसे पहुंचा IPL तक, कोच ने बताई पूरी कहानी

राशिद के करियर से जुड़े सभी तीनों महत्वपूर्ण लोगों का किसी भी मीडिया में आया ये पहला इंटरव्यू है।

Rohitashwa Krishna Mishra| Last Modified - May 27, 2018, 06:23 AM IST

क्वालिफायर-2 मैच में KKR के खिलाफ थ्री इन वन परफॉर्मेंस देने के बाद से ही राशिद खान देश-दुनिया में सुर्खियों में बने हुए हैं। इस मैच में उन्होंने 10 बॉल पर नाबाद 34 रन, 3 विकेट और 2 कैच लिए थे। आज चेन्नई सुपरकिंग्स के     साथ होने वाले IPL के फाइनल मैच में उनकी टीम हैदराबाद इस परफॉर्मेंस को दोबारा रिपीट करवाना चाहेगी। 

काबुल। 8 साल पाकिस्तानी रिफ्यूजी कैम्प में भटकते हुए जिंदगी काटी। 9 साल अफगानिस्तान में गन कल्चर से लड़ते हुए क्रिकेट सीखा। बीच-बीच में पिता के टायर की दुकान में भी काम किया। और अब 19 साल की उम्र में अपनी परफॉर्मेंस से हैदराबाद को फाइनल तक पहुंचा दिया। दुनिया के नंबर 1 T-20 स्पिनर कहे जा रहे राशिद खान अरमानी की अब तक की जर्नी कुछ ऐसी ही रही है। 

 

काबुल से 60 किमी दूर जलालाबाद शहर के रहने वाले राशिद की IPL तक की इस जर्नी में तीन लोगों का सबसे अहम रोल है। पहला उनके भाई जलिल खान का। दूसरा उनके जिले में एकेडमी चलाने वाले अफगानिस्तानी क्रिकेटर हस्ती गुल का। तीसरा और सबसे बड़ा रोल उनके U-19 कोच दौलत खान अहमदजई का। दौलत अभी अफगानिस्तान के हेड कोच भी हैं।

 

DainikBhaskar.com अफगानिस्तान में रह रहे इन तीनों ही लोगों तक पहुंचा। उनसे एक्सक्लूसिव बात करके जाना इस सीजन में 9 करोड़ में बिके राशिद उर्फ लल्ला की पाकिस्तानी कैम्प से इंडिया में IPL तक पहुंचने की पूरी कहानी। राशिद के करियर से जुड़े सभी तीनों महत्वपूर्ण लोगों का किसी भी मीडिया में आया ये पहला इंटरव्यू है।

 

 

पेश है हमारे जर्नलिस्ट रोहिताश्व कृष्ण मिश्रा की ये स्पेशल रिपोर्ट...

 

1. कैसे हुआ क्रिकेट से पहला प्यार

 

# रिफ्यूजी कैम्प में लगी TV ने बनाया क्रिकेट का दीवाना

 

- 2001 में शुरू हुए अफगान वार के चलते राशिद को परिवार के साथ पाकिस्तान रिफ्यूजी कैम्प में रहना पड़ा था। करीब 8 साल वो यहां रहे। 
- कैम्प में केवल एक घर में ही टीवी थी। राशिद चोरी-छिपे वहां जाकर पाकिस्तान का मैच देखता था। यहीं से उसे क्रिकेट से प्यार हो गया। 
- जलिल के मुताबिक, वो और राशिद दोनों पहले टीवी में मैच देखते। फिर लकड़ी के पटरे से कैम्प के बाहर सेम शॉट लगाने और उसी तरह से बॉलिंग की कोशिश करते थे। यहीं से खान ने अफरीदी को अपना आइडियल मानना स्टार्ट कर दिया था।
- उस समय बीट कराने पर ही आउट मान लिया जाता था। वहीं से राशिद की स्पिन कराने की थोड़ी-थोड़ी स्टार्टिंग हुई।

 

# 10 भाई और सभी कराते हैं लेग स्पिन बॉलिंग 

 

- 10 भाई-बहनों में से एक राशिद की टीवी देखकर की जाने वाली प्रैक्टिस रिफ्यूजी कैम्प में पूरे 8 साल तक चली। हालांकि, इस दौरान लकड़ी के पटरे की जगह बैट ने जरूर ले ली थी। 
- राशिद के सभी भाई लोकल लेवल मैचों में लेग स्पिन बॉलिंग कराते थे। 
- दुनिया के यंगेस्ट इंटरनेशनल क्रिकेट कैप्टन राशिद ने इसी संघर्ष के साथ क्रिकेट की शुरुआती जर्नी को आगे बढ़ाया।

 

# टेनिस की बॉल चेहरा ना बिगाड़ दे, इसलिए मां बनाना चाहती थी डॉक्टर

 

- राशिद टेनिस बॉल से प्रैक्टिस करता था। मां को डर था कि कहीं ये बॉल बेटे का चेहरा ना बिगाड़ दे। इसलिए वो उसे डॉक्टर बनाना चाहती थी।
- इसके लिए राशिद पर दबाव भी डाला। लेकिन भाई-बहनों के सपोर्ट के आगे मां को क्रिकेट के प्यार को एक्सेप्ट करना पड़ा।
- जलिल के मुताबिक, बाद में मां से लेकर पूरा परिवार राशिद के क्रिकेट खेलने के फैसले में साथ खड़ा था। जहां भी मैच होता वहां भाई अपने साथ राशिद को ले जाता। मैच खिलवाकर वापस भी लाता था।
- इस दौरान उसने लोकल लेवल पर कुची ट्राइब टीम की तरफ से खेलना भी स्टार्ट किया था।

 

 

2. कैसे हुई अफगानिस्तान टीम में एंट्री

 

# पहले ट्रायल मैच में सबने कर दिया था मना

 

- राशिद के पहले ऑफिशियल कोच और पूर्व अफगानिस्तानी क्रिकेटर दौलत खान अहमदजई थे। उनके मुताबिक, 2012 में जलालाबाद में एक सेलेक्शन ट्रायल में राशिद ने हिस्सा लिया था। 
- अफगानिस्तान के हेड कोच (नेशनल-U19) अहमदजई ने DainikBhaskar.com को बताया कि उस ट्रायल के चीफ सेलेक्टर वो खुद थे। ट्रायल मैच में राशिद की परफॉर्मेंस ज्यादा अच्छी नहीं थी। वो बिना लाइन लेंथ के ज्यादा तेजी से बॉल फेक रहा था। सेलेक्शन कमेटी ने उसे लेने से मना कर दिया था।
- हालांकि, कई लोकल टीमों में ओपनिंग के चलते राशिद की बैटिंग अच्छी थी। अहमदजई ने अपनी गारंटी पर राशिद को एंट्री दिलवाई। और 3 साल तक उस पर कड़ी मेहनत की। 

 

# 30 किमी तक जाना पड़ता था पैदल

 

- अहमदजई से कोचिंग लेने के अलावा राशिद घर से 30 किमी दूर बने नानगरहर क्रिकेट एकेडमी में भी प्रैक्टिस करता था। घर से पैदल जाना पड़ता था। 
- पूर्व अफगानी खिलाड़ी हस्ती गुल इस एकेडमी के हेड थे। गुल और राशिद के भाई जलिल दोनों अच्छे दोस्त थे। 
- गुल ने DainikBhaskar.com को बताया कि एक बार देर रात सारे बैट्समैन के जाने के बाद राशिद सिंगल स्टम्प के साथ बॉलिंग कर रहा था। उनकी स्पिन होती बॉल को देखकर वो सरप्राइज हो गए। इसके बाद गुल डेली राशिद से बॉलिंग करवाने लगे। 
- गुल ने ही ऑफिशियल कोच अहमदजई को राशिद की आल राउंडर प्रतिभा के बारे में पहले बताया था। इसके बाद दोनों ने मिलकर राशिद की बॉलिंग क्वालिटी को इतना तरासा कि 2015 आते-आते उन्हें बॉलिंग के लिए पहचाना जाने लगा।

 

# इंजमाम उल हक ने  दिया था पहला नेशनल ब्रेक

 

- अहमदजई ने बताया, 2015 में पाकिस्तानी क्रिकेटर इंजमाम उल हक अफगानिस्तान के हेड कोच बने। उन्हें जिम्बाब्वे के लिए टीम चुननी थी।
- तब राशिद का नाम अहमदजई ने इंजमाम के सामने प्रपोस किया। लेकिन इंजी नहीं माने। उसके बाद राशिद से उस समय के अफगानिस्तान नेशनल टीम कैप्टन अश्गर स्टैनिकजई को बॉलिंग कराने को कहा गया।
- राशिद की बॉलिंग देखकर कैप्टन सरप्राइज रह गए। फिर कैप्टन और अहमदजई के कहने पर इंजमाम ने राशिद को पहला नेशनल मैच खेलने का मौका मिला। 

 


3. कैसे तय किया IPL तक का सफर

 

# बांग्लादेश में तैयार हुई स्क्रिप्ट

 

- राशिद की IPL में एंट्री की स्क्रिप्ट बांग्लादेश T-20 के टाइम से लिखी जाने लगी थी।
- राशिद के कोच अहमदजई के मुताबिक, 2015 में जिम्बाब्वे दौरे के बाद 2016 में राशिद ने बांग्लादेश T-20 लीग में कोमिला विक्टोरियन्स टीम की तरफ से खेलना स्टार्ट किया। 
- यहां के अच्छे प्रदर्शन के बाद 2017 में आयरलैंड के साथ हुए T-20 मैच में राशिद के 2 ओवर में 5 विकेट ने उसे सेलेक्टर्स की नजरों में पूरी तरह से ला दिया। ऐसा करने वाला वो इस फॉर्मेट का इकलौता खिलाड़ी था। 
- बांग्लादेश लीग के दौरान ही श्रीलंकाई प्लेयर कुमारा संगकारा की नजरें राशिद पर पड़ी। संगकारा ने इस बारे में मुथ्थैया मुरलीधरन से जिक्र किया। मुरलीधरन और टॉम मूडी दोनों तभी से इस खिलाड़ी को फॉलो कर रहे थे।

 

# मुरलीधरन और टॉम मूडी के थ्रू हुई एंट्री

 

- इसी बेहतर परफॉर्मेंस के दम पर हैदराबाद टीम के कोच टॉम मूडी ने 2017 में पहली बार 4 करोड़ में और 2018 में 9 करोड़ में राशिद को खरीदा था।
- अहमदजई का कहना है कि राशिद को IPL में भी जब जरूरत पड़ती है तो वो उनसे स्ट्रैटजी पर डिस्कस करता रहता है। लगभग डेली बात करता है। पिछले दिनों उसने धोनी के खिलाफ भी बॉलिंग को लेकर टिप्स मांगे थे।
- मौजूदा समय में राशिद आईपीएल समेत 7 इंटरनेशनल लीग में खेल रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलियाई लीग और इंग्लैंड काउंटी जैसी लीग शामिल हैं। 

 

आगे देखें खबर से रिलेटेड Photos...

राशिद के पहले कोच और अफगानिस्तान के नेशनल हेड कोच (U-19) दौलत खान अहमदजई (दाएं से दूसरे)
राशिद के पहले कोच और अफगानिस्तान के नेशनल हेड कोच (U-19) दौलत खान अहमदजई (दाएं से दूसरे)
पूर्व अफगानिस्तानी क्रिकेटर और राशिद की पहली एकेडमी के हेड हस्ती गुल
पूर्व अफगानिस्तानी क्रिकेटर और राशिद की पहली एकेडमी के हेड हस्ती गुल
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Web Title: SUNRISERS HYDERABAD IPL CRICKETER RASHID KHAN COACH INTERVIEW FROM AFGHANISTAN
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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