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LoC पर इस जगह भूल कर भी पाकिस्तानी नहीं करते फायरिंग, ये है वजह

स्थानीय लोगों के मुताबिक- 350 साल पुराना है दरगाह, दूर-दूर से यहां आते हैं चर्म रोगी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 10, 2018, 06:39 PM IST

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    जम्मू. LoC पर पाकिस्तान लगातार कायराना हरकतों को अंजाम देते हुए सीजफायर का उल्लंघन करता आ रहा है। इतना ही नहीं पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के घुसपैठ की कोशिश भी निरंतर जारी हैं। वहीं, शनिवार सुबह भी सुंजवां आर्मी कैम्प पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला कर दिया। इसमें सेना के दो सूबेदार शहीद हो गए। कर्नल रैंक के एक अफसर और उनकी बेटी समेत 4 लोग जख्मी हो गए। यहां पाकिस्तानी भूल कर भी नहीं करते फायरिंग...

    लेकिन, जम्मू से 45 किमी दूर एक ऐसी जगह है, जहां गलती से भी पाकिस्तानी रेंजर्स फायरिंग नहीं करते। सीमा पार से ही पाकिस्तानी सैनिक इस जगह के सामने थोड़ी देर रुक कर सजदा करते हैं और फिर आगे निकलते हैं। यहां तक की बीएसएफ के जवान मानते हैं कि यहां एक रूहानी ताकत उनकी रक्षा करती है।

    350 साल पुराना है दरगाह

    - बता दें कि 350 साल पुराना ये बाबा दिलीप सिंह मन्हास का दरगाह है, जिसे बाबा चमलियाल की दरगाह भी कहा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 200 मीटर दूर से दरगाह साम्बा जिले के रामगढ़ सैक्टर में स्थित है।

    - स्थानीय लोगों के मुताबिक- 350 साल पहले यहां के कई गांवों में बाबा का बहुत प्रभाव हुआ करता था। उनके काफी भक्त भी थे। लेकिन कुछ लोगों को उनकी इस लोकप्रियता से जलन होती थी।

    आगे की स्लाइड्स में जानें बाबा चमलियाल की कैसे हुई थी हत्या और क्या है दरगाह का चमत्कार...

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    घात लगाकर की बाबा की हत्या

    - ऐसी मान्यता है कि- एक दिन कुछ बदमाशों ने बाबा को पाकिस्तान के सैदावाली गांव में बुलाया और घात लगाकर बाबा पर हमला कर दिया और उनका सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया। उनका सिर पाकिस्तान के सैदावाली इलाके में रह गया। इसके बाद बाबा का घोड़ा उनका धड़ चमलियाल लेकर चला आया।

    - जहां बाबा के धड़ को दफनाया गया, वहीं उनकी मजार बना दी गई। इसके साथ ही सैदावाली में भी उनका एक दरगाह है, जहां उनके सिर को दफनाया गया था। हर साल दोनों देशों के लोग सीमा पार कर बाबा के ऊर्स के मौके पर दोनों दरगाह पर आते-जाते हैं।

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    भक्त के सपने में आए थे बाबा

    - बताया जाता है कि- बाबा के एक भक्त को काफी गंभीर रूप से चमड़े की बीमारी थी। एक दिन बाबा उसके सपने में आए और मिट्टी (शक्कर) और पानी से कई दिनों तक नहाने की बात कही। तब उस भक्त ने वही किया और उसकी बीमारी दूर हो गई। तब से बाबा को चमड़ी वाले बाबा भी कहा जाने लगा। यहां, कई चर्म रोगी भी आते हैं।

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    जून में मनाया जाता है शहादत दिवस

    - हर साल जून के चौथे गुरुवार को इस दरगाह पर बाबा का शहादत दिवस मनाया जाता है और यहां भव्य स्तर पर मेला लगता है। ऐसा ही पाकिस्तान के सैदावाली दरगाह पर भी किया जाता है।

    - इस मौके पर पाकिस्तानी श्रद्धालु बॉर्डर पर आकर दरगाह पर चढ़ाने के लिए चादर भेंट करते हैं, जो बीएसएफ के जवान ले आकर दरगाह पर चढ़ा देते हैं और बदले में उन्हें यहां की मिट्टी (शक्कर) और पानी देते हैं।

    - सबसे खास बात ये हैं कि यहां जम्मू-कश्मीर के कोने-कोने और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल से अपना इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले लोगों को बीएसएफ रहने की सुविधा उपलब्ध कराती है।

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Web Title: Special Story On Baba Chamliyal Dargah On LoC In Sambha
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