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बूटा मलिक ने की थी अमरनाथ गुफा की खोज

बूटा मलिक ने की थी अमरनाथ गुफा की खोज

bhaskar news | Last Modified - Jul 14, 2015, 12:05 AM IST

  • जम्मू।हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित इस पवित्र गुफा की यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के मन में यह सवाल उठता है कि इतनी ऊंचाई पर स्थित इस गुफा के स्थान तक सबसे पहले कौन पहुंचा होगा या इस गुफा में भगवान शिव के इस रूप में दर्शन किसने किए होंगे। इस प्रश्न का उत्तर पुराण और लोक मान्यताओं में मिलता है। इन सबसे अलग इस गुफा के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसकी खोज एक कश्मीरी मुसलमान ने की थी। इसका नाम था बूटा मलिक। मलिक भेड़ चराने का काम करता था। इसके परिवार के लोग आज भी अमरनाथ गुफा की देखभाल करते हैं।
    कश्मीर सहित पूरे भारत में अमरनाथ गुफा के बारे में जो कथा प्रचलित है उसके अनुसार बूटा मलिक ने ही इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि भेड़ चराने का काम करने वाला यह गड़रिया बहुत अच्छा व्यक्ति था। एक दिन वह भेड़ें चराते-चराते बहुत दूर निकल गया। बर्फीले वीरान इलाके में पहुंचकर उसकी एक साधु से भेंट हो गई। साधु ने बूटा मलिक को कोयले से भरी एक कांगड़ी (हाथ सेंकने की सिगड़ी) दे दी। घर पहुंचकर उसने कोयले की जगह सोना पाया तो वह बहुत हैरान हुआ। उसी समय वह साधु का धन्यवाद करने के लिए गया परंतु वहां साधु को न पाकर एक विशाल गुफा को उसने देखा। गड़रिया जैसे ही उस गुफा के अंदर गया तो उसने वहां पर देखा कि भगवान भोले शंकर बर्फ के बने शिवलिंग के आकार में स्थापित थे। इसके बाद उसने यह बात गांव के मुखिया को बताई और यह मामला वहां के तत्कालीन राजा के दरबार में पहुंचा। इसके बाद समय के साथ इस स्थान के महत्व के बारे में लोगों को मालूम चला और यहां लोगों का आना शुरू हो गया। तभी से यह स्थान एक तीर्थ बन गया।
    ये दावा किया जाता है...
    इतिहासकार गुफा की खोज के बारे में यह कहते हैं कि जिस बूटा मलिक ने इसकी खोज की थी वह मुसलमान नहीं था। उनके अनुसार, इस गुफा को खोजने वाला बूटा मलिक गुज्जर समाज से था। ये भी कहा जाता है कि इतनी ऊंचाई पर गड़रिया भेड़ चराने क्यों जाएगा, जहां आॅक्सीजन तक की कमी होती है। कुछ स्थानीय इतिहासकार यह भी मानते हैं कि 1869 के ग्रीष्मकाल में गुफा की फिर से खोज की गई और पवित्र गुफा की पहली औपचारिक तीर्थयात्रा 3 साल बाद 1872 में आयोजित की गई थी। इस तीर्थयात्रा में बूटा मलिक भी साथ थे। लेकिन, अमरनाथ यात्रा के बारे में जो बुक्स और अन्य साहित्य और जानकारी उपलब्ध है उसमें बूटा मलिक को मुसलमान बताया गया है। अमरनाथ गुफा की देखभाल जो परिवार करता है वह मुसलमान है और वह अपने आपको बूटा मलिक का वंशज बताता है।
    स्वामी विवेकानंद भी गए थे यात्रा पर
    स्वामी विवेकानंद ने 1898 में 8 अगस्त को अमरनाथ गुफा की यात्रा की थी और बाद में उन्होंने उल्लेख किया कि मैंने सोचा कि बर्फ का लिंग स्वयं शिव हैं। मैंने ऐसी सुन्दर, इतनी प्रेरणादायक कोई चीज नहीं देखी और न ही किसी धार्मिक स्थल का इतना आनंद लिया है।
    आगे की स्लाइड्स में देखें अमरनाथ यात्रा के फोटोज...
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