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ऐसी होती है अमरनाथ यात्रा, खतरनाक रास्ते और पहाड़ों को पार करते हैं भक्त

भक्त ऊंचे पहाड़ों और खतरनाक रास्तों को पार कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं।

bhaskar news | Last Modified - Jun 29, 2015, 01:43 AM IST

  • जम्मू।अमरनाथ यात्रा 2 जुलाई से शुरू हो रही है। dainikbhaskar.com विशेष सीरीज के तहत बताने जा रहा इस यात्रा से जुड़ी हर वह बात जो जानना चाहते हैं। इसकी पहली कड़ी में हम आपको बता रहे हैं यात्रा मार्ग के बारे में। अमरनाथ यात्रा आसान नहीं है भक्त ऊंचे पहाड़ों और खतरनाक रास्तों को पार कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं।
    जम्मू से दो जुलाई को अलसुबह यात्रा को हरी झंडी दिखाकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में रवाना किया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर जम्मू की किले बंदी कर दी गई है। यात्रा पर जाने वालों सहित जम्मू हर आने-जाने वाले पर निगाह रखी जा रही है। यात्री निवास में ठहरे यात्रियों और साधुओं के बेवजह बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। सुरक्षा के इंतजाम ऐसे हैं कि सीआरपीएफ की दो कंपनियां तैनात की गई है। दो जुलाई की शाम तक यात्रियों का पहला जत्था शाम तक पहले आधार शिविर पहलगाम तक पहुंच जाएगा।
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  • पहलगाम- अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल
    पहलगाम (समुद्र तल से ऊंचाई 2100) से चन्दनवाडी (समुद्र तल से ऊंचाई 2800) 16 किलोमीटर सड़क मार्ग।
    पहलगाम अमरनाथ यात्रा का आधार शिविर है। यहां यात्रियों की सुरक्षा जांच की जाती है। यहां यात्री रात में आराम करते हैं। प्रशासन और अन्य धार्मिक संस्थाओं द्वारा यहां पर यात्रियों के रुकने और भोजन की व्यवस्था की जाती है। सुबह यहां से चंदनवाड़ी के लिए यात्रा शुरू होती है। कई लोग पैदल ही चल देते हैं। चंदनवाडी के रास्ते में एक जगह पडती है बेताब घाटी। इसी घाटी में बेताब फिल्म की शूटिंग हुई थी। लगभग पूरी फिल्म यही पर शूट की गयी थी। इस स्थान का नाम पहले बैलगांव था जो बाद में पहलगाम हो गया।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ेंपिस्सू घाटी से शेषनाग तक की यात्रा के बारे में
  • पिस्सू घाटी से शेषनाग

    चंदनवाड़ी (समुद्र तल से ऊंचाई 2800) से शेषनाग झील (समुद्र तल से ऊंचाई 3700) 16 किलोमीटर पैदल।
    अमरनाथ यात्रा की पैदल चढ़ाई चंदनवाड़ी से शुरू होती है। चंदनवाड़ी पहलगाम से सोलह किलोमीटर आगे है। यहीं वह स्थान हैं जहां से जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेगे हमें पेड़-पौधे दिखना बंद हो जाएंगे। चंदनवाड़ी की कठिन चढाई चढकर यात्री पिस्सू टॉप पहुंचते हैं। पिस्सू टॉप तक का रास्ता काफी मुश्किल है। यात्री चंदनवाड़ी से यहां तक खच्चर से आ सकते हैं। कहते हैं कि कभी इस स्थान पर देवताओं का और राक्षसों का युद्ध हुआ था। देवता जीत गये। उन्होंने राक्षसों को पीस-पीसकर उनका ढेर लगा दिया। उस ढेर को ही पिस्सू टॉप कहते हैं। पिस-पिसकर लगे ढेर को पिस्सू नाम दे दिया।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें शेषनाग झील की यात्रा के बारे में
  • शेषनाग झील से महागुनस दर्रा 4 किलोमीटर पैदल
    अमरनाथ यात्रा में शेषनाग झील का बहुत महत्त्व है। यह पहलगाम से लगभग 32किलोमीटर दूर है। यह झील सर्दियों में जम जाती है। इसके चारों ओर चौदह-पन्द्रह हजार फीट ऊंचे पर्वत हैं। यहां की सुंदरता देखते ही बनती है। रात में जब ऊंचे पहाड़ों की परछाई झील पर पड़ती है तो ऐसा लगता है कि शेषनाग फन फैलाए बैठे हुए हैं। यह दृश्य देखने के लिए यात्री देर तक यहां खड़े रहते हैं। रात के शांत झील में जब पहाड़ों से पानी झील में गिरता है तो ऐसा लगता है कि शेषनाग फुंकार मार रहे हों। यही से लिद्दर नदी निकलती है, जो पहलगाम की सुन्दरता में दस चांद लगा देती है। इसी के किनारे पर एक यहां पर यात्री रात्रि-विश्राम करते हैं।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें महागुनस चोटी यात्रा मार्ग के बारे में
  • महागुनस चोटी
    महागुनस दर्रे से पंचतरणी 6 किलोमीटर पैदल
    शेषनाग में रात्रि विश्राम के बाद यात्री महागुनस चोटी की और बढ़ते हैं। दिख रही थी। इसे महागणेश भी कहते हैं। कहते हैं कि शंकर जी ने यहां पर गणेश जी को छोडा था। यह चोटी 4200 मीटर से भी ज्यादा ऊंची है। असल में यह दर्रा है। इस दर्रे को पार करके एक दूसरी दुनिया में ही पहुंच जाते हैं।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पंचतरणी यात्रा मार्ग के बारे में
  • पंचतरणी
    पंचतरणी से अमरनाथ गुफा 6 किलोमीटर पैदल
    शेषनाग से चलकर यात्री पंचतरणी पहुंचते हैं। यहां यात्री विश्राम करते हैं। चारों ओर ग्लेशियर हैं तो चारों तरफ से नदियां आती हैं। कहते हैं कि यहां पांच नदियां आकर मिलती हैं इसीलिए इसे पंचतरणी कहते हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। इस घाटी में छोटी-बडी अनगिनत नदियां आती हैं। चूंकि यह लगभग समतल और ढलान वाली घाटी है,इसलिये पानी रुकता नहीं है। अगर यहां पानी रुकता तो शेषनाग से भी बडी झील बन जाती। चांदनी रात में सफेद पहाड़ों से बहता पानी दूध की तरह लगता है। चांद की चांदनी जब बर्फीले पहाड़ों पर पड़ती है तो यहां की सुंदरता देखते ही बनती है। इन पांच नदियों को पांच गंगा कहा जाता है। यहां पित्तर कर्म भी होते हैं। यहां भी शेषनाग की तरह तंबू और भंडारे लगे रहते हैं। यहां से अमरनाथ गुफा की दूरी छह किलोमीटर है।

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  • श्री अमरनाथ दर्शन

    पंचतरणी से चलते ही यात्रियों में बर्फानी बाबा के दर्शन के लिए गजब का उत्साह आ जाता है। पवित्र गुफा यहां से छह किलोमीटर दूर है। सारी यात्रा चढाई भरी है। सकरा रास्ता होने के कारण ज्यादातर समय यह रास्ता एकतरफा ही रहता है। ऐसे में एक तरफ से आने वालों को रोक दिया जाता है और दूसरी तरफ वालों को जाने दिया जाता है। ढाई किलोमीटर पहले ही पवित्र गुफा दिखने लगती है। यही से रास्ता बर्फीला होने लगता है। बर्फ में ही तंबू लगाए जाते हैं। अमरगंगा के किनारे नहाने के लिये शेड लगे थे। पैसे देकर ग4म पानी मिल जाता था है। इसके बाद यात्री गुफा की और दर्शन करने के लिए और गुफा की ओर बढ़ते हैं। गुफा में जब बर्फानी बाबा के दर्शन होते हैं तो की भक्तों की आखों से जलधारा बहने लगती है। मन को ऐसी शांति का अनुभव होता है जिसकी सिर्फ अनुभूति की जा सकती है। कभी-कभी लोगों को यहां पर कबूतरों के दर्शन भी हो जाते हैं जिनका अपना धार्मिम महत्व है।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें अमरनाथ गुफा से बालटाल मार्ग के बारे में
  • अमरनाथ से बालटाल
    अमरनाथ गुफा से बालटाल 16 किलोमीटर पैदल
    बाबा अमरनाथ के दर्शन के बाद ज्यादातर भक्त बालटाल के रास्ते वापस आते हैं। पहलगाम का रास्ता काफी लंबा पड़ता है। अमरनाथ से बालटाल की दूरी चौदह किलोमीटर है। बालटाल वाले रास्ते से यात्रियों को मनाही की जाती है। कारण यह है कि बालटाल वाला रास्ता सुरक्षित नहीं है। पहलगाम वाला रास्ता भले ही लम्बा हो, भले ही कई-कई किलोमीटर बरफ पर चलना पडता हो, लेकिन सुरक्षित है।
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