जम्मू

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दरिंदगी के बेलगाम घोड़े पर 'पोस्को' का चाबुक ! जम्मू में नहीं है ये कानून,

कठुआ और उन्नाव दुष्कर्म मामले का नाम लिए बिना मोदी ने कहा, 'दोषियों को सरकार सजा दिलाने में कोई कोताही नहीं होने देगी'

Dainik Bhaskar

Apr 13, 2018, 09:35 PM IST
Kathua  case: PM Narendra Modi Comment and CJI Deepak Misra Supreme Court Directions to Jammu Bar Association POSCO Act

कठुआ रेप मामले में नया मोड़: जम्मू के कठुआ में हुए गैंग रेप की आग दिल्ली तक तपिश दे रही है। जहाँ प्रधानमंत्री से लेकर सभी पार्टियों के नेता इस शर्मनाक घटना की निंदा कर रहे हैं तो वहीँ मामले ने नया मोड़ा लिया है। पीड़ित परिवार पूरे मामले की सुनवाई अब जम्मू-कश्मीर से बाहर कराना चाहता है। परिवार वालों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता की जम्मू-कश्मीर में पूरे मामले का सही ट्रायल हो पाएगा। साथ ही कहना है की जिस तरह कठुआ में चार्जशीट दायर करने गई क्राइम ब्रांच की टीम को डराया-धमकाया गया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए गए, उन्हें नहीं लगता ऐसे हालात में राज्य के अंदर इस मामले की सुनवाई ठीक से हो पाएगी"। गौरतलब है कि जनवरी के महीने में कठुआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल लड़की, अपने घोड़ों को चराने गई थी और वापस नहीं लौटी। सात दिन बाद उसका शव मिला, जिस पर चोट के गहरे निशान थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई थी कि हत्या से पहले बच्ची को नशीली दवाइयां देकर उसका बलात्कार किया गया था। अभी इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है लेकिन परिवार वालों की मांग है की सुनवाई जम्मू-कश्मीर से बाहर होनी चाहिए।

कठुआ मामले पर राजनैतिक उठापटक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामले में चुप्पी तोड़ दी है। गैंगरेप की दोनों घटनाओँ पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसी घटनाओँ से पूरा देश शर्मसार है। बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा. न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।
जम्मू और कश्मीर के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर का कहना है की आठ साल की बच्ची के साथ की गई ज्यादती में, असली आरोपी अभी भी बाहर हैं। स्थानीय प्रशासन कुछ लोगों को जांच से दूर रख रहा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि जिन पर गैंगरेप का आरोप है वह निर्दोष हैं। कांग्रेसी नेता का मानना है कि कुछ लोगों को जानबूझकर बचाया जा रहा है।
राज्य के फॉरेस्ट मिनिस्टर लाल सिंह और उद्योग मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों मंत्रियों ने अपना इस्तीफा जम्मू-कश्मीर बीजेपी अध्यक्ष को सौंपा है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान : पूरा मामला आग की तरह फ़ैल रहा है इन सब के बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया, जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस कश्मीर में वकीलों के खिलाफ दायर की गई उस याचिका पर लिया है जिसमें आरोप है कि वकीलों ने चार्जशीट दायर करने से रोका था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होनी है।

दरिंदगी के बेलगाम घोड़े पर "पॉक्सो" का चाबुक ! जम्मू में नहीं है ये कानून

भारत में बच्चों के साथ बर्बरता की ये कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी बच्चों के साथ दुराचार होते आये हैं इसी को रोकने के लिए भारत सरकार ने ऐसा ठोस कानून बनाया है जिससे अपराधियों पर नकेल कसी जा सके। इस एक्ट का नाम है पॉक्सो एक्ट, दरअसल जम्मू कश्मीर में रनबीर पीनल कोड लागु होता है और आर्टिकल 370 के आधार पर इंडियन पीनल कोड को यहाँ नहीं माना जाता इसलिए केंद्र सरकार का कानून यहाँ नहीं चलता और इसी आधार पर पॉक्सो एक्ट यहाँ मान्य नहीं है। ये एक्ट जम्मू कश्मीर में लागु नहीं है फिर भी आपको बताते हैं इस कानून में क्या सख्त प्रावधान हैं।

पॉक्सो यानी कि ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस‘ एक्ट। यह कानून साल 2012 में लागू हुआ. इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों और बच्चियों से रेप, यौन शोषण, बलात्‍कार और पॉर्नोग्राफी जैसे मामलों में सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इस अधिनियम की धारा 4 में बच्चे के साथ दुष्कर्म अपराध के बारे में बताया गया।
धारा 6 में दुष्कर्म के बाद गहरी चोटों के मामले में बताया गया।
धारा 7 और 8 में बच्चों के गुप्तांग से छेड़छाड़ वाले मामलों के बारे में बताया गया है। इन सभी मामलों में आरोपी को सात साल या फिर उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।
इस एक्ट के तहत वो नाबालिक बच्चे भी आते हैं जिनकी 18 साल से पहले शादी कर दी जाती है। ऐसे में यदि कोई पति या पत्नी 18 साल से कम उम्र के जीवनसाथी के साथ बिना रजामंदी के यौन संबंध बनाता है तो यह भी पोस्को अपराध की श्रेणी में आता है।
पॉक्सो के तहत किसी अपराध से जुड़े सबूतों को जुर्म के 30 दिनों के अंदर स्पेशल कोर्ट को रिकॉर्ड कर लेने चाहिए।
पॉक्सो एक्ट में अगर अभियुक्त निर्दोष साबित हो जाता है तो इस अवस्था में वह झूठा आरोप लगाने, गलत जानकारी देने और छवि को खराब करने के लिए बच्चों के माता-पिता या अभिववाकों पर केस करने का हक रखता है।

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Kathua  case: PM Narendra Modi Comment and CJI Deepak Misra Supreme Court Directions to Jammu Bar Association POSCO Act
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