गर्भावस्था की इन 8 परेशानियों को ऐसे रखें दूर

3 वर्ष पहले
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महिलाओं के लिए माँ बनना  कुदरत का सबसे बड़ा वरदान है। लेकिन जैसे कोई वरदान घोर तपस्या के बाद मिलता है, उसी तरह माँ बनने का सफ़र भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। गर्भावस्था में महिलाओं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि आयुर्वेदिक नुस्ख़ों का पालन किया जाए, तो उनसे आसानी से निपटा जा सकता है।
तो आइए, आज हम आपको बताते हैं गर्भावस्था के दौरान होने वाली 8 सामान्य समस्याओं और उनके निदान के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में-

1) जानिये गर्भावस्था के दौरान होने वाली 8 सामान्य समस्याओं और उनके निदान

गर्भावस्था में हार्मोन और खान-पान में बदलाव के कारण अधिकतर महिलाओं को अतिसार की समस्या हो जाती है। तो जब भी यह समस्या हो, तो सिर्फ ब्रेड, चावल, सेब और टोस्ट ही खाएं। जितने दिन ये समस्या रहे, उतने दिन दूध या दूध से बना कोई भी आहार न लें। दिन में तीन से चार बार एक चम्मच शहद गुनगुने पानी के साथ लें। नीम्बू पानी में एक चौथाई चम्मच काली मिर्च पाउडर और एक चम्मच शहद मिला कर दिन में कम से कम दो बार पियें। ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं। आराम ना होने पर डॉक्टर की सलाह लें।

3) जानिये गर्भावस्था के दौरान होने वाली 8 सामान्य समस्याओं और उनके निदान

गर्भावस्था में हार्मोन और खान-पान में बदलाव के कारण अधिकतर महिलाओं को अतिसार की समस्या हो जाती है। तो जब भी यह समस्या हो, तो सिर्फ ब्रेड, चावल, सेब और टोस्ट ही खाएं। जितने दिन ये समस्या रहे, उतने दिन दूध या दूध से बना कोई भी आहार न लें। दिन में तीन से चार बार एक चम्मच शहद गुनगुने पानी के साथ लें। नीम्बू पानी में एक चौथाई चम्मच काली मिर्च पाउडर और एक चम्मच शहद मिला कर दिन में कम से कम दो बार पियें। ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं। आराम ना होने पर डॉक्टर की सलाह लें।

गर्भावस्था में बवासीर होने का ख़तरा काफी अधिक रहता है। नियमित आहार ना लेने से ये समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए ज़रूरी है कि आप अपने आहार में सेब, केला, नाशपाती, शकरकंद, गाजर, संतरा और कद्दू जैसी सब्जियों और फलों को शामिल करें। मसालेदार भोजन से बिलकुल परहेज़ करें और अधिक से अधिक पानी पिएं। अगर बवासीर हो जाता है, तो टब में गुनगुना पानी डाल कर उसमें बैठ कर सिंकाई करें।

गर्भावस्था में बवासीर होने का ख़तरा काफी अधिक रहता है। नियमित आहार ना लेने से ये समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए ज़रूरी है कि आप अपने आहार में सेब, केला, नाशपाती, शकरकंद, गाजर, संतरा और कद्दू जैसी सब्जियों और फलों को शामिल करें। मसालेदार भोजन से बिलकुल परहेज़ करें और अधिक से अधिक पानी पिएं। अगर बवासीर हो जाता है, तो टब में गुनगुना पानी डाल कर उसमें बैठ कर सिंकाई करें।

गर्भावस्था की एक और बेहद सामान्य समस्या है कब्ज़। कब्ज़ की समस्या अधिकतर एक से तीन महीने के बीच होती है, क्योंकि इस दौरान जी मिचलाने और उल्टी होने के कारण महिलाएं सही ढंग से आहार नहीं ले पाती हैं। इसके अलावा, डॉक्टर के बताए आयरन सप्लीमेंट्स लेने के कारण भी कब्ज़ की समस्या हो जाती है। इसके समाधान के लिए दिन में कम से कम तीन बार नींबू पानी पिएं, रसीले फल खाएं, अधिक से अधिक तरल आहार लें और रात को सोने से पहले ईसबगोल लें।

गर्भावस्था की एक और बेहद सामान्य समस्या है कब्ज़। कब्ज़ की समस्या अधिकतर एक से तीन महीने के बीच होती है, क्योंकि इस दौरान जी मिचलाने और उल्टी होने के कारण महिलाएं सही ढंग से आहार नहीं ले पाती हैं। इसके अलावा, डॉक्टर के बताए आयरन सप्लीमेंट्स लेने के कारण भी कब्ज़ की समस्या हो जाती है। इसके समाधान के लिए दिन में कम से कम तीन बार नींबू पानी पिएं, रसीले फल खाएं, अधिक से अधिक तरल आहार लें और रात को सोने से पहले ईसबगोल लें।

अधिकतर गर्भवती स्त्रियों को सर्दी, खांसी और गले की सूजन की शिकायत भी हो जाती है। इसके समाधान के लिए सबसे पहले पूरी तरह से आराम की ज़रुरत होती है। आराम से शरीर को सामान्य रखने में आसानी हो जाती है। दिन में तीन से चार बार गर्म पानी का भाप लेना ऐसे में बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारा करने से भी बेहद फायदा होता है।

अधिकतर गर्भवती स्त्रियों को सर्दी, खांसी और गले की सूजन की शिकायत भी हो जाती है। इसके समाधान के लिए सबसे पहले पूरी तरह से आराम की ज़रुरत होती है। आराम से शरीर को सामान्य रखने में आसानी हो जाती है। दिन में तीन से चार बार गर्म पानी का भाप लेना ऐसे में बहुत लाभकारी होता है। इसके अलावा गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारा करने से भी बेहद फायदा होता है।

गर्भावस्था के दौरान गैस, भारीपन और पेट दर्द की समस्या भी आमतौर पर महिलाओं में देखी जाती है। इससे बचने के लिए सबसे पहले अपने आहार से तली हुई चीज़ों को निकाल दें। मसालेदार और तेलयुक्त भोजन ना करें और बहुत अधिक भोजन भी ना करें। इसकी जगह थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा आहार लें। इस समस्या के उपचार के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस मिलाकर पियें। हर आहार के बाद हर्बल चाय में एक चम्मच शहद मिला कर पीना लाभदायक होता है। लगातार होने वाली परेशानी से निदान पाने के लिए रोज़ रात को एक चम्मच मेथी एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह छानकर पानी पी लें।

गर्भावस्था के दौरान गैस, भारीपन और पेट दर्द की समस्या भी आमतौर पर महिलाओं में देखी जाती है। इससे बचने के लिए सबसे पहले अपने आहार से तली हुई चीज़ों को निकाल दें। मसालेदार और तेलयुक्त भोजन ना करें और बहुत अधिक भोजन भी ना करें। इसकी जगह थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा आहार लें। इस समस्या के उपचार के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस मिलाकर पियें। हर आहार के बाद हर्बल चाय में एक चम्मच शहद मिला कर पीना लाभदायक होता है। लगातार होने वाली परेशानी से निदान पाने के लिए रोज़ रात को एक चम्मच मेथी एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह छानकर पानी पी लें।

गर्भावस्था में यूरिन इन्फेक्शन हो जाने पर ज़रूरी है कि आप अधिक से अधिक पानी पियें ताकि पेशाब के ज़रिए आपके शरीर से सभी प्रकार के हानिकारक तत्व बाहर निकल जाएं। इसके अलावा आप विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। दही या छाछ भी यूरीन इन्फेक्शन में बहुत लाभदायक होता है।

गर्भावस्था में यूरिन इन्फेक्शन हो जाने पर ज़रूरी है कि आप अधिक से अधिक पानी पियें ताकि पेशाब के ज़रिए आपके शरीर से सभी प्रकार के हानिकारक तत्व बाहर निकल जाएं। इसके अलावा आप विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। दही या छाछ भी यूरीन इन्फेक्शन में बहुत लाभदायक होता है।

गर्भवती महिला के शरीर में जब ज़रुरत से ज़्यादा द्रव्य इकठ्ठा हो जाता है, तब सूजन की शिकायत होती है। इससे दूर रहने के लिए आवश्यक है कि आप अधिक से अधिक पानी पियें। आपके शरीर में पानी की मात्रा जितनी अधिक रहेगी, उतनी ही सूजन कम होगी। अपना आहार नियमित रखें। दिन में पांच बार थोड़ा-थोड़ा खाएं और हर आहार में 50 से 75 ग्राम तक प्रोटीन शामिल करें। ऐसे फल और सब्जियां खाएं, जिनमें विटामिन सी की मात्रा अधिक हो।

गर्भवती महिला के शरीर में जब ज़रुरत से ज़्यादा द्रव्य इकठ्ठा हो जाता है, तब सूजन की शिकायत होती है। इससे दूर रहने के लिए आवश्यक है कि आप अधिक से अधिक पानी पियें। आपके शरीर में पानी की मात्रा जितनी अधिक रहेगी, उतनी ही सूजन कम होगी। अपना आहार नियमित रखें। दिन में पांच बार थोड़ा-थोड़ा खाएं और हर आहार में 50 से 75 ग्राम तक प्रोटीन शामिल करें। ऐसे फल और सब्जियां खाएं, जिनमें विटामिन सी की मात्रा अधिक हो।

पूर्व प्रसवाक्षेप गर्भावस्था की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भवती स्त्री का ब्लड-प्रेशर हाई होता है। ऐसे में शिशु का गर्भ में विकास रुक जाता है। इस परिस्थिति से बाहर आने के लिए अपने आहार में नमक का प्रयोग बहुत कम करें। दिन में कम से कम 10 गिलास पानी पियें। तला हुआ या बाहर का खाना ना खाएं। पूरी तरह से आराम करें और लेटते समय अपने पैरों के नीचे तकिया लगाएं। ध्यान रखें कि कैफीन का इस्तेमाल पूरे नौ महीनों के दौरान बिल्कुल ना करें।

 

Content By Jananam

पूर्व प्रसवाक्षेप गर्भावस्था की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भवती स्त्री का ब्लड-प्रेशर हाई होता है। ऐसे में शिशु का गर्भ में विकास रुक जाता है। इस परिस्थिति से बाहर आने के लिए अपने आहार में नमक का प्रयोग बहुत कम करें। दिन में कम से कम 10 गिलास पानी पियें। तला हुआ या बाहर का खाना ना खाएं। पूरी तरह से आराम करें और लेटते समय अपने पैरों के नीचे तकिया लगाएं। ध्यान रखें कि कैफीन का इस्तेमाल पूरे नौ महीनों के दौरान बिल्कुल ना करें।

 

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