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सुहागनों का महापर्व 24 को:करवा चौथ पर बनेंगे 6 शुभ योग, आयुर्वेद के मुताबिक बीमारियों से भी बचाता है ये व्रत

एक महीने पहले
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  • सतयुग में सावित्री फिर द्वापर युग में द्रोपदी ने अर्जुन की रक्षा के लिए रखा निर्जल व्रत, इसी तरह शुरू हुई करवा चौथ की परंपरा

करवा चौथ व्रत 24 अक्टूबर को किया जाएगा। सुहागनों का ये पर्व द्वापर युग से चला आ रहा है। इस बार करवा चौथ वाले दिन 6 बड़े शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों की विशेष स्थिति बनने से इस दिन किए गए व्रत और पूजा-पाठ का कई गुना शुभ फल मिलेगा।

इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए बिना कुछ खाए पिए पूरे दिन व्रत रखती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक इस व्रत से महिलाओं की भी सेहत अच्छी रहती है। उज्जैन की आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्वेता गुजराती बताती हैं कि शरद ऋतु के दौरान शरीर में पित्त बढ़ता है। इससे होने वाली बीमारियों से बचने के लिए ये व्रत रखा जाता है। इस कारण महिलाएं दिनभर बिना पानी पिए रहती हैं और रात में मिट्टी के बर्तन से पानी पीकर व्रत खोलती है। ऐसा करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति
कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी पर ग्रह-नक्षत्र विशेष स्थिति में रहेंगे। इस दिन की शुरुआत उभयचरी, शंख, शुभकर्तरी, विमल और शश महापुरुष योग में होगी। साथ ही इस दिन सूर्योदय और चंद्रोदय के वक्त तुला और वृष लग्न रहेंगे। ये दोनों शुक्र की ही राशियां हैं। ये सौभाग्य, समृद्धि और लंबी उम्र देने वाला शुभ संयोग है। इस दिन रविवार और भरणी नक्षत्र से प्रजापति नाम का एक और शुभ योग दिनभर रहेगा। सितारों की ये स्थिति इस पर्व को और खास बना रही है।

महाभारत काल से है परंपरा
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि करवा चौथ की शुरुआत सावित्री की पतिव्रता धर्म से मानी जाती है। सावित्री ने अपने पति की मृत्यु हो जाने पर भी यमराज को उन्हें अपने साथ नहीं ले जाने दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से पा लिया। दूसरी कहानी पांडवों से जुड़ी है।

वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर गए थे। द्रौपदी ने अुर्जन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी। उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के पश्चात अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए।

गणेश, चौथ माता और चंद्र देव की पूजा
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और शाम को चांद निकलने तक रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर नहाती हैं और फिर दिनभर निर्जल यानी बिना पानी पिए व्रत रखने का संकल्प लेती हैं। शाम को चंद्रमा का दर्शन कर के अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर महिलाएं व्रत खोलती हैं। इस दिन श्रीगणेश, चतुर्थी माता और फिर चंद्र देव की पूजा होती है।

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