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आज का जीवन मंत्र:वैवाहिक जीवन में साथी के लिए सम्मान, समर्पण और विश्वास होना बहुत जरूरी है, इनके बिना रिश्ता बिगड़ जाता है

एक महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - शिवपुराण में बिंदुक और चंचुला का किस्सा है। ये दोनों पति-पत्नी थे और शिव-पार्वती के परम भक्त थे। शुरू-शुरू में तो इन दोनों का आचरण भी बहुत अच्छा था, लेकिन कुछ समय बाद बिंदुक का आचरण गिरने लगा। पत्नी के होते हुए भी उसने कई स्त्रियों से गलत संबंध बना लिए थे।

चंचुला को पति के गलत कामों के बारे में सबकुछ मालूम था, बहुत समय तक उसने धैर्य रखा। अपने पति की उपेक्षा और गलत आचरण की वजह से उसका धैर्य भी टूट गया और वह भी अपने आचरण से गिर गई। अब चंचुला ने भी कई पुरुषों से अनैतिक संबंध बना लिए। इसके कुछ समय बाद बिंदुक की मृत्यु हो गई। माना जाता है कि उसकी आत्मा पिशाच योनि में चली गई थी।

पति की मृत्यु के बाद एक दिन चंचुला को ज्ञान हुआ कि मैंने बहुत गलत काम किए हैं। अब जो भी जीवन बचा है, मैं उसमें धर्म-कर्म करूंगी और अपने पापों का प्रायश्चित करूंगी, संसार की सेवा करूंगी।

चंचुला ने ऐसा किया भी, वह शिवपुराण की कथा सुना करती थी। जब चंचुला की मृत्यु हुई तो पार्वतीजी ने अपने पति शिवजी से कहा, ‘मैं इसे अपनी सेविका बनाना चाहती हूं।’ और देवी ने उसे अपनी सेविका बना लिया।

चंचुला ने देवी से कहा, ‘आपने मुझे तो अपनी सेविका बना लिया, अब आप मेरे पति को भी मुक्ति दिला दें और उसे भी यहां ले आएं।’

शिवजी बोले, ‘जिस पति ने जीवनभर इसकी इतनी उपेक्षा की है, ये अभी भी उसी के बारे में सोच रही है।’

पार्वतीजी बोलीं, ‘आप इसके पति को भी कैलाश पर ही बुला लीजिए और अपना सेवक बना लीजिए।’

देवी के कहने शिवजी ने बिंदुक को भी कैलाश बुलवा लिया। उन्होंने पार्वती जी से पूछा, ‘देवी आपने ऐसा निर्णय क्यों लिया?’

देवी बोलीं, ‘पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति विश्वास रखें। धोखा न दें। ये इस रिश्ते के लिए बहुत जरूरी है। चंचुला का क्या दोष है? उसके पति ने उसकी उपेक्षा की तो वह कब तक अपना चरित्र बचा सकती थी। पुरुष प्रधान समाज है तो क्या पुरुष जैसा चाहेगा, वैसा आचरण करेगा? किसी स्त्री को इतना दबाया जाए कि उसका विस्फोट ही हो जाए। मैंने चंचुला को इसीलिए अपने साथ रखा है कि संसार ये संदेश ले कि पति-पत्नी को एक-दूसरे का मान करना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के प्रति समर्पण और विश्वास बनाए रखें।’

सीख - वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच भरोसा नहीं होगा तो ये रिश्ता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा। स्त्री और पुरुष दोनों ही समान हैं। इस रिश्ते को बनाए रखने के लिए पति-पत्नी की समान जिम्मेदारी होती है। पुरुष होने का अर्थ ये नहीं है कि वह कैसा भी आचरण कर सकता है और स्त्री होने का अर्थ ये नहीं है कि हर बार वह खुद को ही दोष मानती रहे।

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