• Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, First Meeting Of Shriram And Hanuman, Hanuman And Shriram Story

आज का जीवन मंत्र:हमारे काम से दोनों पक्षों का भला हो, हमेशा ऐसे निर्णय लेना चाहिए

3 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
  • कॉपी लिंक

कहानी - श्रीराम और हनुमान जी की पहली मुलाकात में कुछ ऐसे संदेश हैं, जो आज भी हमारे लिए काम आ सकते हैं। श्रीराम हनुमान को अपनी तकलीफ बता चुके थे कि मेरी पत्नी सीता का एक राक्षस ने अपहरण कर लिया है। हम सीता को खोज रहे हैं, लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं मिल रही है।

श्रीराम की बात सुनने के बाद हनुमान जी ने कहा, 'मैं वानरों के राजा सुग्रीव का दूत हूं। मेरे राजा की परेशानी यह है कि उनका बड़ा भाई बालि उनको मारने के लिए ढूंढ रहा है। आप दोनों अपने-अपने ढंग से परेशान हैं। आप मेरे पूज्य हैं, मैं आपसे निवदेन करूंगा कि आप सुग्रीव से मित्रता कर लें। उन्हें अभय दान दे दें। आप सुग्रीव को आश्वस्त कर दें कि बालि उन्हें नहीं मार पाएगा। इसके बाद सुग्रीव आपको ये सेवा भेंट करेंगे कि सीता जी की खोज में वानर सेना को भेजा जाएगा।'

श्रीराम ने हनुमान जी की बात सुनी और धीरे से लक्ष्मण से कहा, ‘इसे कहते हैं, त्वरित बुद्धि और दूरदर्शिता। हनुमान ने मेरी समस्या सुनी और सुग्रीव की समस्या तो वे जानते ही हैं। दोनों की समस्याएं एक साथ कैसे खत्म हो सकती हैं, इसका समाधान भी हनुमान ने खोज लिया।‘

हनुमान जी जैसे लोग दूसरों का भला चाहते हैं और किसी भी काम को तत्काल अंजाम तक पहुंचाते हैं।

सीख – हनुमान जी की कार्यशैली से हम सीख सकते हैं कि दोनों पक्ष का भला हो, हमेशा ऐसे काम करना चाहिए। एक की समस्या में दूसरे का समाधान और दूसरे की समस्या में पहले का समाधान खोजना चाहिए। इसे दूरदर्शिता और बुद्धिमानी कहेंगे।