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  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Importance Of Love, Forgiveness, Avoid Violence, Motivational Story Of Dadu Dayalji

आज का जीवन मंत्र:मन में प्रेम रखें, दूसरों को क्षमा करने में देर न करें और हिंसा से बचेंगे तो दुश्मन भी मित्र बन जाएंगे

8 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - संत दादू दयाल को दुनियाभर में सहनशीलता, धैर्य और भक्ति की वजह से जाना जाता है। एक दिन सेना का एक अधिकारी दादू दयालजी से मिलने के लिए घोड़े पर बैठकर निकला।

उस समय जंगल में एक पेड़ के नीचे दादू दयालजी बैठे हुए थे। सेना का अधिकारी उन्हें जानता नहीं था। वह सेना अधिकारी था तो उसके स्वभाव में अकड़ भी थी। जब अधिकारी ने पेड़ के नीचे एक बूढ़े व्यक्ति को बैठा हुआ देखा तो वह बोला, ‘अरे बूढ़े, मुझे दादू दयालजी से मिलना है, मुझे उनकी कुटिया का रास्ता बता दो।’

दादू दयाल ध्यान में बैठे हुए थे। वे अधिकारी के सवाल का जवाब नहीं दे पाए तो अधिकारी नाराज हो गया। वह घोड़े से उतरा और दादू दयाल को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ पड़ने के बाद दादूजी ने मुस्कान के साथ कहा, ‘क्या बात है?’

अधिकारी ने कहा, ‘मैं दादू दयाल का पता पूछ रहा हूं और तुम चुपचाप बैठे हुए हो, मुस्कुरा रहे हो।’ अधिकारी ने उन्हें और पीट दिया, उसने सोचा कि ये कोई पागल व्यक्ति है तो वह उन्हें वहीं छोड़कर आगे बढ़ गया।

कुछ दूरी पर अधिकारी को गांव का एक व्यक्ति दिखा तो उसने फिर पूछा, ‘मुझे दादू दयाल की कुटिया का रास्ता बता दो।’

वह व्यक्ति दूर से ही अधिकारी और दादू दयाल के बीच हुई घटना देख रहा था। उसने अधिकारी से कहा, ‘चलिए मैं आपको उनसे मिलवा देता हूं।’

वह व्यक्ति अधिकारी को लेकर दादू दयाल के पास पहुंचा और बोला, ‘ये ही दादू दयाल हैं।’

ये बात सुनते ही अधिकारी बहुत शर्मिंदा हो गया। वह दादू दयाल के पैरों में गिर पड़ा और बोला, ‘मैं तो आपको गुरु बनाना चाहता था, मैंने ये क्या कर दिया।’

दादू दयाल ने उस अधिकारी को उठाया और गले से लगा लिया। दादूजी बोले, ‘भैया, अगर कोई दो पैसे का मटका भी खरीदता है तो ठोक-बजाकर देखता है। तुम तो मुझे गुरु बनाना चाहते हो। तुमने मुझे ठोका भी ठीक से और बजाया भी ठीक से।’

ये बातें सुनकर अधिकारी को समझ आ गया कि संत ऐसे ही स्वभाव की वजह से संत होते हैं। उनकी महानता उनके क्षमा स्वभाव में, धैर्य और सहनशीलता में होती है।

सीख - दूसरे लोग ये बात नहीं जानते हैं कि हम कितने महान हैं? लेकिन हमें अपने आचरण से नहीं गिरना है। उस अधिकारी ने हिंसा की, लेकिन दादू दयाल प्रेम, धैर्य और सहनशीलता का संदेश दे रहे थे। जो व्यक्ति भीतर से प्रेम से लबालब है, जिसकी प्रवृत्ति क्षमा करने की है, जो धैर्यवान है, उसके आसपास इतनी सकारात्मक ऊर्जा होती है कि एक दिन विरोधी भी मित्र बन जाते हैं।