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आज का जीवन मंत्र:हमें अपने निर्णय खुद लेना चाहिए, दूसरों पर निर्भर रहने से बचें

3 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी – शिवजी का विवाह पार्वतीजी से होने जा रहा था। बड़े अलग ढंग से शिवजी तैयार हुए थे। शरीर पर भस्म थी। गले में सांप था। उनका स्वरूप बहुत ही अनूठा था। हिमालय के राजा के महल के द्वार पर रानी मैना देवी शिवजी की आरती उतारने खड़ी थीं। जैसे ही मैना देवी ने शिवजी को देखा तो उनके हाथ से आरती की थाली गिर गई। सभी को लगा कि ये तो अपशकुन हो गया।

अपशकुन के बाद शिवजी का अपमान शुरू हो गया। मैनाजी ने कहा, ‘अगर मुझे पहले मालूम होता तो मैं ऐसे दूल्हे से मेरी बेटी का विवाह नहीं करती। मैंने नारदजी के कहने पर इस विवाह के लिए हां कहा था। अभी भी मैं मेरी बेटी को लेकर पहाड़ से कूद जाऊंगी, अग्नि में जल जाऊंगी, पानी में डूब जाऊंगी, लेकिन मेरी बेटी का विवाह ऐसे दूल्हे से नहीं करूंगी।’

सभी को लगा कि शिवजी अब पलट जाएंगे, क्योंकि उनका अपमान हो रहा है। किसी ने शिवजी से पूछा, आपको क्रोध नहीं आ रहा? शिवजी ने मुस्कान के साथ कहा, ‘एक तो मैं घर बसाने जा रहा हूं तो अहंकार किस बात का। मैं क्या हूं, अच्छा हूं या बुरा हूं, ये सबसे अच्छा मैं तय कर सकता हूं। मेरे बारे में निर्णय करने वाले ये कौन हैं? ये लोग स्वतंत्र हैं, इन्हें मेरे बारे में जो सोचना है, सोच सकते हैं। मैं जो हूं, वो हूं।’

कुछ देर बाद वहां नारदजी आए और उन्होंने मैनाजी को समझाया और शिव-पार्वती का विवाह हो गया।

सीख – जीवन में जब भी मान-सम्मान या अपमान हो तो उसमें बहना नहीं चाहिए। कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका संचालन दूसरे लोग करते हैं। हमारी लाइफ का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथ में नहीं होना चाहिए।