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आज का जीवन मंत्र:हमेशा बड़े-बूढ़े ही नहीं, कभी-कभी युवा भी सही बात कह देते हैं

एक महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - चारों वेदों का संपादन करने वाले वेद व्यास बूढ़े हो चुके थे। बुढ़ापे में उनके यहां संतान हुई। उसका नाम रखा शुकदेव। शुकदेव जन्म लेते ही ज्ञानी हो गए थे और वे वैरागी थे।

शुकदेव इतने प्रतिभाशाली थे कि लोगों को इस बात का आभास हो गया था कि ये व्यक्ति निराला होगा। जब शुकदेव जी अपना घर छोड़कर जाने लगे तो संतान के मोह में वेद व्यास ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

वेद व्यास बोले, 'तुम हमारे पुत्र हो। बड़ी तपस्या के बाद मिले हो। ऐसे घर-गृहस्थी छोड़कर जाने का क्या फायदा?'

शुकदेव ने कहा, 'आप मेरे मोह में ये बात कह रह रहे हैं। मेरे जीवन का उद्देश्य कुछ अलग है। मेरा जन्म भी विशेष उद्देश्य के लिए हुआ है। आप मुझे जाने दीजिए। मुझे मेरे ज्ञान से, वैराग्य से पूरे जगत का भला करना है।'

व्यास जी ने समझाते हुए कहा, 'संतान से स्वर्ग मिलता है। लोग इसलिए बच्चे की कामना करते हैं।'

शुकदेव बोले, 'संतान से ही स्वर्ग मिलता है तो जानवरों को भी मिल जाता। पिताजी आप मोह में हैं।'

व्यास जी को ये बातें समझ आ गईं और उन्होंने शुकदेव को जाने दिया।

सीख - पिता-पुत्र की ये बातचीत हमें ये सीख देती है कि हमेशा बड़े ही सही बोलते हैं, ऐसा नहीं है। कभी-कभी युवा भी सही बात कह देते हैं। बड़ों की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों की बातें भी ध्यान से सुनें और जो बातें सही हों, उन्हें स्वीकार भी करें।