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आज का जीवन मंत्र:अगर हमें किसी ने कोई वस्तु संभालने की जिम्मेदारी दी है तो उसका निजी उपयोग करना गलत है

8 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - पक्षीराज गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन माने गए हैं। गरुड़ बहुत ईमानदार थे। उनकी माता का नाम था विनता। विनता को सौतन कद्रू की गुलामी करनी पड़ती थी। माता गुलामी करती थी तो गरुड़ को भी सौतेली माता और उनके बच्चे सर्पों की सेवा करनी पड़ती थी।

एक दिन गरुड़ ने सौतेली माता से पूछा, ‘हम आपकी दासता से कैसे मुक्त हो सकते हैं?’

सौतेली मां कद्रू बोली, ‘गरुड़ तुम मुझे अमृत लाकर दो, तब तुम्हें मुक्ति मिलेगी।’

गरुड़ अमृत लेने स्वर्ग पहुंच गए। वहां सभी देवताओं ने विरोध किया। यक्ष और गंधर्वों को युद्ध करने के लिए भेज दिया, लेकिन गरुड़ ने सभी को पराजित कर दिया और अमृत कलश लेकर पृथ्वी पर आ गए।

रास्ते में गरुड़ को भगवान विष्णु मिल गए। उन्होंने पूछा, ‘कहां जाते हो गरुड़?’

गरुड़ ने जवाब दिया, ‘सौतेली मां ने अमृत मंगवाया है, वही लेकर जा रहा हूं।’

भगवान विष्णु ने कहा, ‘क्या तुम जानते हो? अगर तुम इसे पी लो तो अमर हो जाओगे। फिर कुछ भी कर सकते हो।’

गरुड़ बोले, ‘इस समय मैं मेरी सौतेली माता की आज्ञा का पालन कर रहा हूं। मैंने उन्हें आश्वस्त किया है कि मैं अमृत लेकर आऊंगा। इसके बाद वे मुझे मुक्त करेंगी। इस समय ये उनकी संपत्ति है और मैं किसी दूसरे की संपत्ति में बेईमानी नहीं कर सकता, भले ही ये अमृत है।’

ये बात सुनकर भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, ‘गरुड़, तुम्हारी ईमानदारी और निष्ठा का मैं सम्मान करता हूं। तुम्हें बहुत ऊंचा स्थान मिलेगा और तुम बिना अमृत के भी अमर हो जाओगे। ये ईमानदारी का फल है।’

सीख - अगर किसी ने हमें कोई वस्तु संभालने की जिम्मेदारी दी है या किसी की कोई कीमती वस्तु हमारे पास रखी है तो हमें अधिकार नहीं है कि हम उस वस्तु का निजी उपयोग करें। किसी की व्यक्तिगत संपत्ति, सार्वजनिक संपत्ति या राष्ट्रीय संपत्ति का सिर्फ अपने निजी लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमें हर परिस्थिति में ईमानदारी से व्यवहार करना चाहिए।