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आज का जीवन मंत्र:हमारी जिद की वजह से किसी का नुकसान हो रहा है तो हमें जिद छोड़ देनी चाहिए

2 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - श्रीकृष्ण का जन्म हो गया था और उनके पिता वसुदेवजी बालकृष्ण को अन्न छानने वाले एक सूपड़े में रखकर अपने सिर पर रखते हैं और कारागार से गोकुल की ओर चल पड़ते हैं। कारागार से सभी सिपाही गहरी नींद में थे।

बालकृष्ण को जन्म के बाद गोकुल पहुंचाना था, अगर ऐसा नहीं करते तो कंस अगले दिन बालक को मार देता। वसुदेवजी जब कृष्ण को लेकर मथुरा के राजमार्ग से जा रहे थे, उस समय बहुत तेज बारिश हो रही थी, जिससे यमुनाजी में बाढ़ आ गई थी। वसुदेवजी को यमुना नदी पार करनी थी।

यमुनाजी श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पटरानियों में से एक हैं। यमुनाजी ने सोचा, 'मेरे होने वाले पति जन्म ले चुके हैं, मुझे मेरा जलस्तर बढ़ाकर इन्हें स्पर्श करना चाहिए।' ये सोचकर यमुनाजी ने अपना जलस्तर बढ़ाना शुरू कर दिया, लेकिन कृष्ण सूपड़े से अपने पैर बाहर ही नहीं निकाल रहे थे। वसुदेवजी ने सोचा, 'मैं नदी पार करके ही मानूंगा।'

दुनिया में तीन तरह के हठ माने गए हैं। पहला, राजहठ। दूसरा, बालहठ। तीसरा, त्रिया हठ। राजहठ यानी जब राजा हठ पर उतर आता है। उस समय वसुदेवजी राजा के रूप में हठ कर रहे थे कि मैं नदी पार करूंगा। बालहठ कृष्ण का था कि मैं पैर सूपड़े के अंदर ही रखूंगा। त्रियाहठ यमुनाजी का था कि मैं कृष्ण के पैर स्पर्श जरूर करूंगी।

कृष्ण को लगा कि बाढ़ का पानी ऊपर हो जाएगा तो मेरे पिता पानी में डूब जाएंगे तो उन्होंने हठ छोड़कर अपने पैर सूपड़े से बाहर निकाल दिए। यमुनाजी ने भगवान के पैर स्पर्श किए और अपना जलस्तर कम कर लिया।

सीख - यहां भगवान ने हमें सीख दी है कि हठ करना भी अच्छी बात है। हठ यानी जिद के पीछे हमारा कोई संकल्प है तो जिद से संकल्प पूरा करने की ताकत मिलती है, लेकिन हमारी जिद से किसी का नुकसान हो रहा हो तो हमें समय रहते अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। अगर हम जिद पर अड़े रहे और किसी का नुकसान हो गया तो वो जिद गलत होती है। जिद उस समय अच्छी रहती है जब हम किसी की भलाई के लिए कोई रचनात्मक काम कर रहे होते हैं।