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आज का जीवन मंत्र:कभी भी गलत लोगों के साथ न रहें, वर्ना बुरी संगत में अच्छे लोग भी बुरा काम कर देते हैं

2 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी- अयोध्या के राजमहल में श्रीराम का राजतिलक होने वाला था। सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। कैकेयी राजा दशरथ से हमेशा कहा करती थीं कि राम का राजतिलक कर देना चाहिए। कैकेयी के सगे बेटे भरत थे, लेकिन वह राम को बहुत प्रेम करती थीं।

अयोध्या में मंथरा नाम की एक सेविका थी। वह कैकेयी के साथ उनके मायके से दहेज में आई थी। मंथरा की बुद्धि देवी सरस्वती ने फेर दी थी। मंथरा थी भी कुटिल।

मंथरा कैकेयी के पास जाती है और कहती है, 'राम का राजतिलक होने वाला है।'

कैकेयी उससे प्रसन्न होकर कहती हैं, 'तू बोल तुझे क्या इनाम चाहिए, तूने आज मुझे मेरे मन की बात सुनाई है। मैं आज बहुत प्रसन्न हूं कि राम राजा बन रहा है।'

मंथरा तो कैकेयी की मति बिगाड़ने आई थी, यहां कैकेयी राम की प्रशंसा कर रही हैं, लेकिन मंथरा जैसे लोग कभी थकते नहीं हैं। मंथरा ने सबसे पहले कुछ तर्क दिए तो कैकेयी ने सारी बातें खारिज कर दीं।

मंथरा जानती थी कि कैकेयी जेल जाने से बहुत डरती हैं, कारागृह उनका आंतरिक भय है। मंथरा ने इस बात का फायदा उठाया। मंथरा जैसे लोग दूसरों की कमजोरी का फायदा उठाना बहुत अच्छी तरह जानते हैं।

मंथरा ने कहा, 'अगर राम राजा बने तो राम और कौशल्या तुमको कारागृह में भेज देंगे।'

ये सुनकर कैकेयी डर गईं और पूछने लगीं, 'बताओ मैं क्या करूं?'

मंथरा कहती है, 'राजा कोई भी बने, मुझे इससे क्या मतलब? राजा अपने आप को निष्पक्ष और अच्छा बताते हैं।'

थोड़ी देर पहले जो कैकेयी मंथरा को थप्पड़ मार चुकी थीं, इस बात के लिए कि वह राम की आलोचना कर रही है, वही कैकेयी अब पूछती हैं, 'तू बता अब मुझे क्या करना चाहिए?'

मंथरा ने कहा, 'राम को वनवास और भरत को राज।'

मंथरा एक वृत्ति का नाम है। मंथरा जैसी वृत्ति जब हमारे अंदर आ जाती है तो हम अपने ही घर को तोड़ने का काम करते हैं।

सीख - किसी भी स्थिति में कुसंगति कभी नहीं करनी चाहिए। कैकेयी जैसी भली महिला जो राम से बहुत प्रेम करती थीं, वह भी मंथरा के चक्कर में आ गईं और राम को वनवास भेज दिया। इस बात का ध्यान हमेशा रखें कि किन लोगों के साथ हमें रहना चाहिए? किन लोगों की सलाह माननी चाहिए और किन लोगों की सलाह नहीं माननी चाहिए, ये बात हमेशा ध्यान रखें।