आज का जीवन मंत्र:जो लोग इंसानों में भेदभाव करते हैं, उनका मन हमेशा अशांत रहता है

8 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
  • कॉपी लिंक

कहानी - रामायण में श्रीराम मतंग ऋषि का बहुत सम्मान करते थे। श्रीराम ने इसकी वजह भी बताई थी। वे कहा करते थे मतंग ऋषि ने भक्ति में भेदभाव को खत्म किया है।

मतंग ऋषि शबरी के गुरु थे। शबरी एक भीलनी थी, वह भगवान की भक्त थी। उसका मन भक्ति में बहुत लगता था, क्योंकि उसे देवी-देवताओं की कथा सुनने को मिलती थी। उस समय कोई भी ऋषि-मुनि शबरी को अपने आश्रम में आने नहीं देता था, उसे सभी जगह से भगा दिया जाता था।

शबरी की इच्छा थी कि वह ऋषि-मुनियों की सेवा करे। उसने अपने क्षेत्र के आश्रम के रास्ते को झाड़ू से साफ करना शुरू किया। रास्ते के नुकीले पत्थर, कांटे हटा दिए। शबरी ये काम आधी रात में ही रोज कर देती थी। जंगल में लकड़ियां काटकर भी साधु-संतों के लिए रख देती थी।

वहां के ऋषि-मुनि रोज सुबह देखते कि ये साफ-सफाई इतनी रात में कौन करके चला जाता है? ये बात जानने के लिए एक रात में सभी संत छिपकर बैठ गए और उन्होंने शबरी को रास्ते की सफाई करते हुए देख लिया, इससे सभी गुस्सा हो गए।

ऋषि-मुनियों ने कहा, 'हम तेरी सेवा नहीं ले सकते हैं। तू नीची जाति की है और स्त्री है। हम सभी ब्रह्मचारी हैं।' सभी संतों ने शबरी को बुरा-भला कहना शुरू कर दिया। उसी समय वहां एक ऋषि थे मतंग मुनि। उन्होंने शबरी को प्रोत्साहित किया और कहा, 'तुम मेरे आश्रम में रह सकती हो। मेरी नजर में तुम न स्त्री हो और न ही भीलनी हो। तुम सिर्फ एक भक्त हो। जब यहां राम आएंगे तो वे तुमसे मिलने जरूर आएंगे।'

मतंग ऋषि ने गुरु बनकर शबरी को आशीर्वाद दिया था। बाद में श्रीराम शबरी के आश्रम पहुंचे थे। शबरी ने भगवान की खूब सेवा कि तो श्रीराम बोले, 'मैं समाज में भेदभाव नहीं रखता हूं।'

सीख - श्रीराम और मतंग मुनि ने एक बात बताई है कि समाज में रहना है तो सभी को एक समान समझें और सभी की सेवा करें। स्त्री-पुरुष, छोटे-बड़े का भेद मिटा देना चाहिए। भगवान ने सिर्फ मनुष्य बनाए हैं। इंसानों ने भेदभाव करना शुरू कर दिया। जो भेद करता है, वह कभी सुखी और शांत नहीं रह सकता है। भले ही ऐसे लोगों के पास सभी सुविधाएं हों, लेकिन उनका मन अशांत ही रहता है।