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  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Motivational Story Of Sant Namdev, We Should Not Cut Trees And Plant

आज का जीवन मंत्र:ध्यान रखें जितने प्राण इंसानों में होते हैं, उतने ही पेड़-पौधों में भी हैं

2 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - गोणाई देवी संत नामदेव की मां थीं। गोणाई देवी अपने बेटे का स्वभाव बहुत अच्छी तरह जानती थीं और उन्हें लग रहा था कि ये बालक एक दिन बहुत बड़ा भक्त बनेगा।

एक दिन मां की दृष्टि बेटे नामदेव की ओर गई तो देखा कि उसके कपड़े पर खून लगा हुआ है। तब माता ने पूछा, 'नामदेव, तेरे कपड़ों पर ये रक्त कहां से आया?'

बालक नामदेव बोला, 'मां, आज मैंने कुल्हाड़ी से अपने पैर की चमड़ी को छीला तो रक्त निकल आया।'

गोणाई देवी बोलीं, 'इसका कारण क्या है? कोई अपने पैर को ऐसे कैसे छील सकता है?'

नामदेव ने कहा, 'मां, आपने मुझे एक दिन पलाश के पेड़ की छाल उतारने के लिए कहा था, मैंने ऐसा किया भी था। आज मेरे मन में आया कि उस दिन मैंने पेड़ की छाल उतारी थी तो उसे दर्द हुआ होगा या नहीं। जिस तरह मैंने पेड़ के तने को छीला था, ठीक उसी तरह मैंने अपने पैर को भी छीला तो मुझे दर्द मालूम हुआ।'

मां समझ गईं कि ये क्या करके आया और क्या कहना चाहता है? तब माता ने उससे कहा, 'सचमुच तेरे भीतर साधु के लक्षण हैं।'

सीख - जब हम हर प्राणी में, प्रकृति में जीवन देखने लगते हैं तो ऐसे भाव आते हैं। हमें समझना चाहिए कि जितने प्राण हम मनुष्यों में हैं, उतने ही पेड़-पौधों में भी हैं। कभी भी अकारण किसी पेड़ को नहीं काटना चाहिए, नामदेव ने यही संदेश दिया है।