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आज का जीवन मंत्र:कभी भी बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए, वरना अपमानित होना पड़ सकता है

4 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - दक्ष प्रजापति ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया था। यज्ञ में सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनियों को बुलाया गया था, लेकिन दक्ष ने अपने दामाद शिवजी को आमंत्रित नहीं किया।

शिवजी की पत्नी सती को ये बात मालूम हुई तो उन्होंने पति से कहा, 'मेरे पिता के यहां यज्ञ हो रहा है, मैं जाना चाहती हूं।'

शिवजी ने कहा, 'हमें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया है।'

सती ने तर्क देते हुए कहा, 'कुछ स्थानों पर बिना आमंत्रण भी जा सकते हैं, माता-पिता के यहां, गुरु के यहां, मित्र के यहां और धार्मिक कार्यक्रम में। मैं अपने पिता के यहां यज्ञ में जा रही हूं तो इसमें बुराई क्या है?'

शिवजी बोले, 'देवी, बात केवल आमंत्रण या यज्ञ की नहीं है। असल बात ये है कि हमें न बुलाने के पीछे दक्ष का इरादा हमें अपमानित करने का है। वे किसी बात को लेकर मुझसे मतभेद रखते हैं, बिना बुलाए ऐसी जगहों पर जा सकते हैं, जहां हमें सम्मान मिलता है, लेकिन जहां अपमान होने की संभावनाएं हैं, वहां हमें नहीं जाना चाहिए।'

शिवजी के समझाने के बाद भी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गईं। आयोजन में देवी का अपमान हुआ, किसी ने उनसे बात नहीं की, देवी की गरिमा के विपरीत शब्द बोले गए।

सती को समझ आ गया कि मेरे पति ठीक कह रहे थे। इसके बाद योग अग्नि से अपने शरीर को भस्म कर दिया।

सीख - इस कथा का संदेश ये है कि हम जब भी किसी आयोजन में जाते हैं तो ये बात ध्यान रखें कि हमें क्यों बुलाया गया है? और, अगर आमंत्रण नहीं है तो हमें बुलाया क्यों नहीं गया है? ऐसे कई उदाहरण और तर्क दिए जाते हैं कि माता-पिता, गुरु, मित्र और धार्मिक आयोजन में बिन बुलाए जा सकते हैं, लेकिन इन तर्कों के पीछे के सत्य को समझ लेना चाहिए। केवल उदाहरण देकर अपनी बात को सच साबित करके बिन बुलाए किसी के घर जाने से बचना चाहिए। खासतौर पर ऐसी जगह न जाएं, जहां हमारा अपमान होने की आशंका है।