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आज का जीवन मंत्र:घर में अन्य बातों के साथ ही सत्संग भी करते रहना चाहिए

7 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - कर्दम ऋषि तपस्या करने के लिए जंगल चले गए थे। उनकी पत्नी का नाम देवहुति था। कर्दम ऋषि की नौ कन्याएं और एक पुत्र था। पुत्र का नाम कपिल था।

कपिल को भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक माना गया है। इन्हें ज्ञान का अवतार माना जाता है। कपिल देव की मां देवहुति ने बेटे से कहा, 'इस आश्रम में हम दोनों अकेले हैं। एक काम करो, तुम ऊंचे आसन पर बैठो और मैं नीचे बैठूंगी, तुम मेरे गुरु बन जाओ, मैं तुम्हारी शिष्या बन जाती हूं। मेरे कुछ प्रश्न हैं, जिनके उत्तर तुम मुझे दो।'

देवहुति ने धीरे-धीरे जीवन से संबंधित कई प्रश्न पूछे। कपिल देव ने बड़े सुंदर उत्तर भी दिए। उन दोनों के वार्तालाप को शास्त्रों में बहुत ही सुंदर तरीके से बताया गया है। भक्ति करते समय मन न लगे, कैसे शांति प्राप्त हो, ऐसी अनेक बातों के उत्तर इस वार्तालाप में बताए गए हैं।

सीख - ये कहानी एक संदेश देती है कि गुरु-शिष्य सत्संग करते हैं, मित्र से मित्र का सत्संग होता है, माता-पिता बच्चे, पति-पत्नी में भी सत्संग होता है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है जब मां और बेटे में सत्संग हुआ हो। इस कथा में एक मां ने ज्ञान प्राप्त करने के लिए अपने ही बेटे को गुरु बनाया था। हमारे घर-परिवार में हम अनेक बातें करते हैं, लेकिन शांति से बैठकर सत्संग भी करना चाहिए। ताकि जीवन के प्रश्नों का उत्तर घर में प्राप्त हो सके।