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आज का जीवन मंत्र:कभी भी अपने परिवार में भेदभाव न करें, ये रिश्तों के लिए खतरा है

19 दिन पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से किया था। वैसे तो चंद्रमा के लिए सभी 27 पत्नियां एक समान होनी चाहिए थीं, लेकिन वह रोहिणी से बहुत अधिक प्रेम करते थे।

चंद्र की शेष 26 पत्नियों ने अपने पिता दक्ष प्रजापति से इस बारे में शिकायत कर दी। दक्ष ने चंद्र से कहा, 'मैं 27 कन्याओं का पिता हूं और मेरे लिए सभी पुत्रियां एक समान हैं। मैंने इनका विवाह आपसे किया है तो आपके लिए भी सारी पत्नियां एक जैसी होनी चाहिए। तो आप आपकी पत्नियों में भेदभाव क्यों करते हैं? क्यों रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम और बाकी को तिरस्कृत कर रहे हैं?

चंद्र ने दक्ष के सामने सभी से एक समान व्यवहार की बात स्वीकार कर ली, लेकिन बाद में उसका पालन नहीं किया। चंद्र की पत्नियों ने फिर से अपने पिता से चंद्र की शिकायत की तो ससुर से अपने दामाद को शाप दे दिया कि तुम्हें क्षय रोग हो जाए। आज इस रोग की टीबी के नाम से जाना जाता है।

इस शाप की वजह से चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, वे बड़े दुख हुए। चंद्र देव को बीमार देखकर सभी देवताओं को चिंता होने लगी। सभी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और चंद्रदेव के बीमार होने की बात कही और पूछा, 'चंद्रदेव की बीमारी कैसे दूर की जाए? कृपया कोई उपाय बताएं।'

ब्रह्मा जी ने कहा, 'चंद्रदेव सभी देवताओं के साथ प्रभास क्षेत्र में जाएं और शिवलिंग बनाकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। तब क्षय रोग दूर हो सकता है।'

जब चंद्रदेव ने ऐसा किया तो शिव जी प्रकट हुए। शिव जी ने कहा, 'माह के पक्ष में तुम्हारी कलाएं क्षीण होंगी और दूसरे पक्ष में तुम्हारी कलाएं बढ़ती रहेंगी।' इसी वजह से चंद्र आज भी एक पक्ष में बढ़ता है और दूसरे पक्ष में घटता है।

सीख - इस किस्से का संदेश ये है कि रिश्तों में कभी भी भेदभाव नहीं करना चाहिए। चंद्र ने ऐसा किया तो ससुर ने शाप दे दिया। आज कई परिवारों में लोग एक-दूसरे की आलोचना करते हैं, जबिक ऐसा नहीं करना चाहिए। परिवार में भेदभाव और आलोचना करना, रिश्तों के लिए खतरा है।