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  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Story Of Dr. Abdul Kalam, We Should Accept Mistakes Of Our Family Members

आज का जीवन मंत्र:जिन्हें आप अपना मानते हैं, उन्हें उनकी गलतियों के साथ स्वीकार करना चाहिए

2 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ भोजन कर रहा था। उसने देखा कि पिता की थाली में रोटियां जली हुई हैं और वे जली रोटियां खा भी रहे हैं।

खाना खिलाने वाली मां सामने बैठकर देख रही है। मां बहुत थकी हुई लग रही थी। बेटा इतना छोटा भी नहीं था कि वह कुछ समझ न सके। उसने देखा कि पिता ने भोजन कर लिया।

रात में बच्चे ने पिता ने पूछा, 'पिता जी, आज मां ने आपको जली रोटियां दीं और आपने वो सब खा भी लीं। बल्कि आपने तो ये कह दिया कि अब्दुल की अम्मा, हमें तो जली हुई रोटियां भी पसंद आईं, अच्छी लगती हैं। आपने ऐसा क्यों कहा?'

पिता ने बच्चे से कहा, 'तकलीफ तो तुम्हारी अम्मा को भी हो रही थी, मुझे जली रोटियां खिलाकर, लेकिन अगर मैं शिकायत करता तो तुम्हारी अम्मा की तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती। गलतियां सबसे होती हैं, जिन्हें तुम अपना मानते हों, उन्हें गलतियों के साथ स्वीकार करना चाहिए। तभी तो रिश्ते संवरेंगे।'

ये घटना प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के बचपन की है। उनके पिता नाव चलाते थे, यात्रियों को इधर से उधर ले जाते थे।

सीख - इस कहानी का संदेश ये है कि घर-परिवार में सभी सदस्य एक समान योग्य नहीं होते हैं। अगर किसी से कोई गलती हो जाए तो उसे ये अहसास न होने दें कि उससे गलती हो गई है, बल्कि उसकी गलती को सुधारने की कोशिश करें। अपने लोगों की गलती को स्वीकार करें और सुधारें, यही रिश्तों की गरिमा है।