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  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Story Of Naradmuni And Devraj Indra, We Should Not Doubt Good Person

आज का जीवन मंत्र:जब भी कोई अच्छा व्यक्ति बड़ा काम, भक्ति या तप करता है तो उसकी नीयत पर शक न करें

3 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - एक दिन देवर्षि नारद घूमते-घूमते हिमालय की तलहटी में पहुंच गए। वहां का वातावरण उन्हें इतना अच्छा लगा कि वे वहीं तपस्या करने बैठ गए। देश, काल और परिस्थितियों की अनुकूलता और भाव शून्य मन की वजह से नारद गहरे ध्यान में उतर गए।

देवर्षि ने ऐसा तप किया कि देवराज इंद्र का आसन डोल उठा। इंद्र को लगने लगा कि नारद मेरा स्वर्ग मुझसे छीनना चाहते हैं, इसीलिए तप कर रहे हैं। सत्ता में बैठे लोगों को हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि कहीं कोई उनकी सत्ता छीन न ले। यही भय को इंद्र को भी था।

इंद्र ने कामदेव से कहा, ‘जाओ, नारद की तपस्या भंग करो।’

इंद्र का आदेश मिलते ही कामदेव नारद के पास पहुंच गए। वे अपने साथ अप्सराओं को ले गए थे। उन्होंने बसंत ऋतु का निर्माण किया और नारद का तप भंग करने की कोशिश करने लगे, लेकिन बहुत प्रयासों के बाद भी नारद की तपस्या खंडित नहीं हुई। कामदेव हार चुके थे।

देवर्षि नारद ने आंखें खोलीं तो कामदेव अपने किए की उनसे क्षमा मांगने लगे। कामदेव ने कहा, ‘आप जीत गए।’

नारद ने कहा, ‘तुम्हें यहां किसने भेजा? इंद्र ने? जाओ और अपने राजा इंद्र से कहना, मैंने ये तपस्या उनकी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं की थी। मैंने ये तप दो कारणों से किया है। पहला, मेरा स्वाध्याय। दूसरा, मैं चाहता हूं कि प्रकृति को और समाज को मेरे तप के माध्यम से कुछ अच्छा मिल सके। ओज और तेज मिल सके। मेरा काम लोक सेवा करना है, सत्ता हासिल करना मेरा काम नहीं है।’

जब ये बात इंद्र का मालूम हुई तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया कि मैंने एक साधु की तपस्या पर संदेह किया है।

सीख - नारद और इंद्र की ये कहानी हमें सीख दे रही है कि अच्छे लोग जो भी काम करते हैं, वह समाज की, प्रकृति की भलाई और खुद के स्वाध्याय के लिए करते हैं। अच्छे लोगों के कामों पर, उनकी भक्ति पर शक नहीं करना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों को भी स्वाध्याय और नेक काम करने वाले व्यक्तियों की मदद करनी चाहिए।