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  • Aaj Ka Jeevan Mantra By Pandit Vijayshankar Mehta, Story Of Raja Parikshit And Shukdev Ji, Bhagwat Katha Facts, Lesson Of Lord Krishna

आज का जीवन मंत्र:किसी को कुछ समझाना है तो सबसे पहले उसके संदेह को दूर करें, फिर सही उदाहरण के साथ बात कहें

12 दिन पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

कहानी

महाभारत में राजा परीक्षित को शाप मिला था कि सात दिन बाद तक्षक नाग उन्हें डंस लेगा। शाप की वजह से ये तय हो गया था कि सात दिन बाद परीक्षित की मृत्यु होने वाली है।

राजा परीक्षित ने विचार किया कि अंतिम दिनों में मुझे शुकदेव जी से भागवत कथा सुननी चाहिए और कथा के माध्यम से ये जानना चाहिए कि जब इंसान की मृत्यु होती है तो शरीर से आत्मा कैसे निकलती है।

परीक्षित शुकदेव जी के पास पहुंच गए। शुकदेव जी ने उन्हें कथा सुनाना शुरू किया। जब कथा में श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आने वाला था तो परीक्षित ने एक प्रश्न पूछा, 'श्रीकृष्ण के चरित्र में इतने आयाम क्यों हैं? कभी वे गोपियों के साथ नाचते हैं, मटकी फोड़ते हैं, कभी ज्ञान देते हैं।'

ये बातें सुनकर शुकदेव जी समझ गए कि मेरा श्रोता परीक्षित श्रीकृष्ण के चरित्र की वजह से भ्रम में फंस गया है। इसके बाद उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्म की कथा से पहले राम कथा सुनाई। राम कथा मर्यादा पुरुषोत्तम की कथा थी। वे भी विष्णु जी के ही अवतार थे।

कथा सुनते-सुनते परीक्षित को समझ आ गया कि भगवान अवतार लेते हैं तो देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार अपनी भूमिकाएं तय करते हैं। राम के समय में राम का चरित्र जरूरी था और श्रीकृष्ण के समय में युग बदल गया। इस वजह से श्रीकृष्ण ने कुछ अनूठे काम किए।

शुकदेव जी ने जिस तरह से श्रीकृष्ण जन्म कथा से पहले राम कथा सुनाई थी, ये उनकी बुद्धिमानी थी।

सीख

इस किस्से से हमें ये सीख मिलती है कि जब किसी व्यक्ति को हमें कोई बात समझानी हो तो सबसे पहले उसके संदेह को समझें और फिर उसे दूर करें, इसके बाद अपनी बात ऐसे उदाहरण के साथ कहें कि सामने वाला व्यक्ति आसानी से हमारी बात समझ सके। ये प्रयोग शुकदेव जी ने परीक्षित के साथ किया था और उन्हें इसमें सफलता भी मिली थी।