आज का जीवन मंत्र:कभी भी रिश्तों में गलत आचरण न करें, वर्ना किसी न किसी रूप में दंड जरूर मिलता है

4 महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता

कहानी

रामायण में श्रीराम के कहने पर सुग्रीव एक माला पहनकर अपने भाई बालि से युद्ध करने पहुंच गए। इससे पहले बाली ने सुग्रीव को मारकर भगा दिया था। अब दूसरी बार श्रीराम पर भरोसा करके सुग्रीव बाली से युद्ध कर रहा था।

दोनों भाई लड़ रहे थे, उस समय श्रीराम ने तीर चलाया और वह सीधे बालि की छाती में लगा। बालि घायल हो गया। जब बाली अंतिम सांसें ले रहा था तो उसने श्रीराम पर आरोप लगाया, 'आपका अवतार धर्म के लिए हुआ है, आपने मुझे शिकारी की तरह छिपकर क्यों मारा? सुग्रीव आपका प्यारा क्यों हो गया? मैं आपका दुश्मन क्यों बन गया?'

श्रीराम ने कहा, 'बालि तुम्हारी पत्नी तारा ने तुम्हें समझाया था कि राम से मत लड़ो।'

ये बात सुनकर बालि को याद आया कि तारा ने कहा था कि राम भगवान हैं। बालि को लगा कि मेरी पत्नी के साथ जो बात एकांत में हुई थी, उसके बारे में राम को कैसे मालूम हुआ?

श्रीराम ने आगे कहा, 'अपने छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी, पुत्री ये चारों रिश्ते मेरे लिए एक जैसे हैं। तुमने अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी का भी अपहरण कर लिया। मेरा सिद्धांत है कि अगर कोई इन चारों रिश्तों पर कोई बुरी डालता है तो उसे मारने से पाप नहीं लगता है। मैंने तुझे इसी गलत काम का दंड दिया है।'

सीख

श्रीराम ने यहां शिक्षा दी है कि कभी भी रिश्तों में गलत आचरण न करें। परिवार में नैतिकता, पवित्रता, चरित्र और अपनापन होना चाहिए। जो लोग घर-परिवार के रिश्तों छेड़छाड़ करते हैं तो भगवान हमें किसी न किसी रूप में दंड जरूर देते हैं।