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आज का जीवन मंत्र:बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा में लगाएंगे तो उनका भविष्य सुधर सकता है

8 दिन पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - रामायण का प्रसंग है। रावण की मां कैकसी और पिता विश्रवा ऋषि थे। विश्रवा की एक और पत्नी थी, जिसका नाम इडविडा था। इडविडा का एक पुत्र वेश्रवण था। वेश्रवण का एक नाम कुबेर भी है।

कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, इनके पास पुष्पक विमान था। उस समय कुबेर लंका में रहते थे और पुष्पक विमान में बैठकर अपने पिता विश्रवा से मिलने आश्रम आते थे। आश्रम में रावण अपनी माता कैकसी के साथ रहता था।

जब भी कुबेर पुष्पक विमान से आश्रम आते तो बालक रावण पुष्पक विमान को बहुत ध्यान से देखता और उसके चारों ओर चक्कर लगाता था। रावण जानता था कि ये विमान उसके बड़े भाई वेश्रवण का है। एक दिन रावण ने माता कैकसी से कहा, 'मैं वेश्रवण जैसा बनना चाहता हूं।'

कैकसी ने कहा, 'क्या तू भी पुष्पक और लंका पाना चाहता है?'

बालक रावण ने कहा, 'हां मां, मैं भी पुष्पक और लंका पाना चाहता हूं।'

कैकसी बोली, 'सिर्फ चाहने से कुछ नहीं होता। तुझे छीनना पड़ेगा। तू अपने बड़े भाई से ये सब छीन, उस पर आक्रमण कर। वो बहुत शक्तिशाली है और तू अभी इतना शक्तिशाली नहीं है। पहले तुझे बलवान बनना पड़ेगा। इसके लिए तू तप कर।'

मां ने उस बच्चे का दिमाग ऐसा घुमाया कि तपस्या पुण्य के लिए की जाती है, लेकिन रावण ने तप पाप अर्जित करने के लिए किया। रावण ने तप किया और वरदान पाकर वह इतना बलवान हो गया कि उसने भाई से लंका और पुष्पक विमान छीन लिया।

सीख - माता-पिता बच्चों को जो शिक्षा देते हैं, उससे बच्चों का भविष्य बनता है। अगर कैकसी ने बालक रावण को ये रास्ता नहीं बताया होता तो रावण बुराइयों का प्रतीक नहीं बनता। माता-पिता बचपन से ही बच्चों को अच्छे कामों के लिए प्रेरित करें, बुरी आदतों से बचाएं और अच्छे संस्कार दें, तभी बच्चों का भविष्य सुखद बन सकता है।

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