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आज का जीवन मंत्र:मन गलत बातों की ओर भटकने लगे तो अपना सच्चा उद्देश्य ध्यान रखें, बुरे काम करने से बच जाएंगे

5 दिन पहले
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कहानी - वीर सावरकर कारागार में बंद थे और कठोर यातनाओं से गुजर रहे थे। जेल में दूसरे अपराधियों को तो थोड़ी बहुत राहत मिल जाती थी, लेकिन जो लोग राज अपराधी यानी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुआ करते थे, उन्हें अंग्रेज बड़ा कठोर दंड देते थे।

कोल्हू के चक्र में बैल की जगह वीर सावरकर को जोत दिया जाता था। उन्हें लगातार चक्कर लगाने पड़ते थे, रुकना तो अपराध था, इसका दंड मिलता था। आराम करने के लिए कोल्हू की लकड़ी पर कुछ देर टिक सकते थे। उन्हें इतना चलाया जाता कि लगातार गोल-गोल घूमने से उन्हें चक्कर आने लगते थे। जब रात में सोने का समय आता तो शरीर इतना टूट चुका होता था कि दर्द की वजह से नींद भी नहीं आती थी। शरीर पर पसीना होता और उस पर धूल-मिट्टी, कचरा चिपक जाता था। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने ही शरीर को देखकर ऐसा लगता कि हम ये क्यों कर रहे हैं? किस उद्देश्य के लिए हम ये यातना सह रहे हैं? ऐसे विचार वीर सावरकर के मन में आते थे।

वे सोचते थे कि कौन जान पाएगा कि हम यहां इतनी पीड़ा भुगत रहे हैं, क्यों हम ऐसा कर रहे हैं? फांसी हो जाए या भाग जाएं तो तुरतं मुक्ति मिल जाएगी। ऐसे विचार उनके मन में चला करते थे।

वीर सावरकर जब शांति से सोचते कि मेरा उद्देश्य भारत को आजाद कराना है। जब इतना बड़ा उद्देश्य है, करोड़ों लोगों की सेवा करनी है, मातृभूमि के लिए हम ये यातना सह रहे हैं, तो ऐसा सोचते ही सारी यातनाओं का दर्द दूर हो जाता था।

वे कहा करते थे कि मन ऐसा ही होता है जो कभी-कभी कहता है, छोड़ो ये सब। मन का स्वभाव ही ऐसा है, उल्टा सोचने पर मजबूर करता है, लेकिन अगर हमारा उद्देश्य पवित्र हो तो हमारा मन हावी नहीं हो सकता है।

सीख - मन ने तो वीर सावरकर को भी नहीं छोड़ा, हम तो सामान्य लोग हैं। जब भी हमारा मन भटकने लगे, अच्छे काम से हमें दूर करने लगे तो अपने सच्चे उद्देश्य पर ध्यान लगाना चाहिए। उद्देश्य दूसरों की भलाई से जुड़ा होगा तो हम मन की गलत बातों से बच जाएंगे।