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आज का जीवन मंत्र:अपने ज्ञान पर घमंड न करें, दूसरों की जानकारी और समझदारी का भी सम्मान करें

एक महीने पहलेलेखक: पं. विजयशंकर मेहता
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कहानी - गुरुनानक देवजी अपने शिष्यों के साथ एक ऐसे गांव के पास पहुंचे जो विद्वानों का गांव था। गुरुनानक ने गांव में प्रवेश नहीं किया और गांव की सीमा पर ही अपना डेरा डाल दिया। सभी शिष्यों को ये बात बहुत अजीब लगी कि गुरुनानक सीधे गांव में नहीं गए, लेकिन किसी ने कुछ कहा नहीं।

अगले दिन उस गांव के कुछ लोग गुरुनानक के पास पहुंचे। वे लोग एक गिलास में दूध लबालब भरकर लाए थे। उन्होंने वह गिलास गुरुनानक के सामने रख दिया। गुरुनानक ने उस गिलास में गुलाब की कुछ पंखुड़िया डाल दीं। गांव के लोग गिलास उठाकर लौट गए।

कुछ देर बाद गांव के लोग फिर से आए और उन्होंने गुरुनानक को अपने गांव में आने का निमंत्रण दिया। ये देखकर सभी शिष्य हैरान थे।

गांव वालों के जाने के बाद शिष्यों ने कहा, 'हमें कुछ समझ नहीं आया। पहले तो हमने गांव के बाहर डेरा दिया। फिर गांव के लोग दूध का गिलास लेकर आए, आपने उसमें फूल की पत्तियां डाल दीं और फिर वे लोग आपको आमंत्रित कर रहे हैं।'

गुरुनानक ने कहा, 'ये एक सांकेतिक भाषा है। दरअसल, ये गांव विद्वानों का गांव है। हम ये बात पहले से जानते हैं। इसीलिए गांव में सीधे प्रवेश नहीं किया। वहां से संकेत आया कि यहां गिलास में दूध की तरह ज्ञान लबालब भरा है। अब आप हमें क्या देने आए हैं? तब मैंने गुलाब की पत्तियां डालकर ये कहा कि आपके ज्ञान के साथ हम कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे। हमारे पास जो भी समझ है, वह आपके ज्ञान के ऊपर रखकर लौट जाएंगे। गांव वालों ने ये बात स्वीकार कर ली और हमें गांव में आने का निमंत्रण दिया।'

गिलास में दूध लबालब भरा था, अगर उसमें कुछ और चीज डाली जाती तो दूध छलक जाता। इसीलिए गुरुनानक ने उसमें फूल की पत्तियां डाल दीं। फूल की पत्तियों से गिलास के दूध में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई।

सीख - गुरुनानक ने हमें एक बात समझाई है कि दुनिया में सभी अपने-अपने ढंग से विद्वान हैं, लेकिन जब दो विद्वान मिलते हैं तो उनके बीच टकराव हो जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। एक विद्वान का ज्ञान दूसरे विद्वान की भावनाओं को आहत न करे, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। हम ज्ञानी है, इस बात का घमंड न करें और दूसरों को मूर्ख समझने की गलती न करें। दूसरों की अक्ल, जानकारी और समझदारी का भी सम्मान करना चाहिए।

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