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अचला एकादशी 6 जून को:इस व्रत से नहीं लगता जाने अनाजाने हुए पापों का दोष, लक्ष्मीजी भी खुश होती हैं

14 दिन पहले
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  • इस एकादशी व्रत से लक्ष्मीजी अचला यानी स्थिर रहती हैं, जिससे नहीं रहती धन की कमी

ज्येष्ठ महीने के कृष्णपक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी पर व्रत के साथ ही भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साधक को अपार धन से संपन्न बनाती हैं, इसलिए इसे अपरा एकादशी कह जाता है। इस साल ये व्रत 6 जून को किया जाएगा।

पद्म पुराण में अपरा एकादशी
भगवान विष्णु की कृपा के लिए किए जाने वाले एकादशी व्रतों का जिक्र कई धर्मग्रंथों में किया गया है। पद्मपुराण के मुताबिक अपरा एकादशी का व्रत करने से इंसान को प्रेत बनकर कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। अपरा एकादशी को अचला एकादशी, भद्रकाली एकादशी और जलक्रीड़ा एकादशी भी कहा जाता है।

दूसरों की बुराई से बचना चाहिए
इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में किए उन सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है, जिनके कारण प्रेत योनि में जाना पड़ता। पद्मपुराण में बताया गया है कि इस एकादशी के व्रत से आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि दूसरों की बुराई, झूठ, ठगी, छल ऐसे पाप हैं, जिनके कारण किसी इंसान को दूसरा जन्म मिलने से पहले इनका फल भोगना पड़ता है। इस एकादशी के व्रत से इन पापों के प्रभाव में कमी आ जाती है।

तुलसी पत्र, चंदन और गंगाजल से पूजा
एकादशी के दिन स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में तुलसी पत्ता, चंदन, गंगाजल एवं मौसमी फलों का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। इस दिन संकल्प लेना चाहिए कि दूसरों की बुराई, झूठ और छल-कपट से दूर रहेंगे। जो लोग किसी कारण व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें एकादशी के चावल और उससे बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।

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