बुधवार को अगहन अमावस्या:23 नवंबर को पितरों के धूप-ध्यान करने का शुभ योग, अमावस पर तीर्थ दर्शन और नदी में स्नान करने की है परंपरा

7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

बुधवार, 23 नवंबर को अगहन मास की अमावस्या है। इस दिन अगहन माह का कृष्ण पक्ष खत्म होगा और 24 तारीख से शुक्ल पक्ष शुरू होगा। अगहन मास की अमावस्या को पर्व की तरह माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, धूप-ध्यान और तीर्थ दर्शन करने का महत्व काफी अधिक है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक बुधवार को अमावस्या होने से इस दिन गणेश पूजा करने का शुभ योग बन रहा है। साथ ही, इस दिन बुध ग्रह के लिए भी पूजन करना चाहिए।

अमावस्या पर पितरों के लिए करें धूप-ध्यान

अगहन अमावस्या पर पितरों के लिए धूप-ध्यान, श्राद्ध, तर्पण आदि शुभ कर्म करना चाहिए। धूप-ध्यान के लिए गाय के गोबर से बने कंडे का उपयोग करें। कंडे जलाएं और जब कंडों से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब जलते हुए कंडों के अंगारों पर पितरों का ध्यान करते हुए गुड़-घी चढ़ाएं। धूप देते समय घर-परिवार के सभी पितरों का ध्यान करना चाहिए।

धूप-ध्यान दोपहर में 12 बजे के बाद ही करें, क्योंकि दोपहर का समय पितरों से जुड़े शुभ कर्म करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

पितरों के लिए धन, अनाज और गर्म कपड़ों का दान भी करें।

अगहन अमावस्या पर करें नदी स्नान

  • इस दिन सुबह-सुबह पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अगर आपके शहर में या आसपास नदी नहीं है और किसी तीर्थ स्थान पर जाने की योजना नहीं बन रही है तो घर पर नदियों का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं।
  • अमास्या पर नदी में स्नान के बाद वहीं किनारे पर जरूरतमंद लोगों को अपने सामर्थ्य के अनुसार धन, अनाज, कंबल, गर्म कपड़े का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में पूजन सामग्री दान करें।

अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम

  • अमावस्या शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। मंत्र जप रुद्राक्ष की माला की मदद से करें।
  • हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • बुधवार को गणेश जी का अभिषेक करें। दूर्वा चढ़ाएं। लड्डू का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। गणेश जी के मंत्र श्री गणेशाय नम: मंत्र का जप करें।