उपवास:26 मई को अपरा एकादशी व्रत करना चाहते हैं तो दस बातें ध्यान रखें, इस दिन करना चाहिए गीता का पाठ

एक महीने पहले
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गुरुवार, 26 मई को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे अपरा एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के लिए व्रत उपवास करना चाहिए। गुरुवार को एकादशी होने से इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

अपरा एकादशी और गुरुवार के योग में किए गए व्रत-उपवास से कुंडली के गुरु ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. निलेश शास्त्री के मुताबिक इस तिथि पर कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। जानिए ये बातें कौन-कौन सी हैं...

पहली बात - इस एकादशी तिथि पर भगवद् गीता का पाठ जरूर करना चाहिए। गीता का पाठ करें या सुनें। ऐसा करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। ऐसी मान्यता है।

दूसरी बात - जो लोग वृद्ध हैं, उन्हें खासतौर पर इस एकादशी पर गाय का और अन्न का दान करना चाहिए। अगर गाय का दान करना संभव न हो तो किसी गौशाला में धन का दान करें।

तीसरी बात - अगर कोई व्यक्ति बीमार है तो उसे एकादशी व्रत करने से बचना चाहिए। बीमार व्यक्ति के लिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

चौथी बात - अगर किसी व्यक्ति के घर में इस तिथि के आसपास किसी मृत्यु हो जाए, कोई सूतक है तो उन्हें भी व्रत नहीं करना चाहिए।

पांचवीं बात - एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को एक समय फलाहार करना चाहिए। इस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।

छठी बात - जो लोग ये व्रत करते हैं, उन्हें आलस्य से बचना चाहिए। सुबह जल्दी उठें और ईमानदारी से अपने काम करें।

सातवीं बात - एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूजा-पाठ करनी चाहिए और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना चाहिए। मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।

आठवीं बात - विष्णु जी के मंदिर जाएं। भगवान के दर्शन करें। तुलसी, पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करें।

नवीं बात - जो लोग अपरा एकादशी व्रत करना चाहते हैं, उन्हें भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का विशेष अभिषेक करना चाहिए। तुलसी के साथ भगवान को मिठाई का भोग लगाएं।

दसवीं बात - अभी गर्मी का समय चल रहा है। एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को छाते का दान करें। किसी प्याऊ में मटके का और जल का दान करें। अगर संभव हो सके तो किसी सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगवाएं।