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पूजा-पाठ और मान्यताएं:28 और 29 जून को अमावस्या, इस तिथि पर सूर्य-चंद्र रहते हैं एक राशि में और इसके स्वामी हैं पितर देवता

2 महीने पहले
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मंगलवार, 28 जून और बुधवार, 29 जून को आषाढ़ मास की अमावस्या है। इसे हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। मंगलवार को पितरों के लिए धूप-ध्यान करें और बुधवार को नदी स्नान और दान-पुण्य करें। अमावस्या तिथि पर आषाढ़ माह का कृष्ण पक्ष खत्म हो जाएगा। इसके बाद 30 जून से आषाढ़ शुक्ल पक्ष शुरू होगा।

उज्जैन के ज्योतिषार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक हिन्दी पंचांग के एक महीने में दो पक्ष होते हैं- एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष। एक पक्ष 15 तिथियों का होता है। कृष्ण पक्ष में चंद्र घटता है और अमावस्या पर पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है। शुक्ल पक्ष में चंद्र की कलाएं बढ़ती हैं यानी चंद्र बढ़ता है और पूर्णिमा पर चंद्र पूर्ण रूप से दिखाई देता है। पूर्णिमा पर चंद्र बड़ा और अधिक चमत्कार दिखता है। अमावस्या पर एक ही राशि में रहते हैं सूर्य-चंद्र, जानिए अमावस्या तिथि से जुड़ी खास बातें...

  • ज्योतिष में चंद्र की सोलह कलाएं बताई गई हैं और सोलहवीं कला का नाम है अमा। अमावस्या पर चंद्र की अमा कला रहती है। अमा चंद्र की महाकला है, इस कला में चंद्र की सभी कलाओं की शक्तियां रहती हैं। इस कला का कभी भी क्षय या उदय नहीं होता है।
  • अमावस्या तिथि का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र से होता है। इस तिथि पर सूर्य और चंद्र एक साथ एक ही राशि में स्थित रहते हैं। आषाढ़ अमावस्या पर चंद्र और सूर्य एक साथ मेष राशि में रहेंगे।
  • पितर देवता को अमावस्या तिथि का स्वामी कहा जाता है। हमारे घर-परिवार और कुटुंब के मृत लोगों को पितर देवता कहा जाता है। अमावस्या पर पितरों की तृप्ति और शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और, धूप-ध्यान करने की परंपरा है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य भी करना चाहिए।
  • अमावस्या तिथि पर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इस दौरान सभी पवित्र नदियों में तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल के साथ ही फूल और चावल भी डाल लेना चाहिए। अर्घ्य अर्पित करते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करना चाहिए।
  • अमावस्या पर अपने इष्टदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार को चंद्र देव की प्रतिमा की भी पूजा करें। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें।
  • मंगलवार को अमावस्या होने से इस दिन मंगल ग्रह की पूजा का भी शुभ योग बन रहा है। मंगल देव को लाल फूल, लाल गुलाल, लाल मसूर की दाल, लाल वस्त्र चढ़ाएं। ऊँ भौं भौमाय नम: मंत्र का जप करें। इस दिन किसी गौशाला में गौमाता की सेवा भी जरूर करनी चाहिए।