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शुभ संयोग:आज मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती पर बन रहा है अमृतसिद्धि योग, राशि अनुसार दान से बढ़ेगा पुण्य फल

एक महीने पहले
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आज मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है। तिथि, वार और नक्षत्र का शुभ संयोग होने से आज अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। जिससे इस पर्व का पुण्य फल और बढ़ जाएगा। स्कंद, पद्म और विष्णु पुराण के मुताबिक मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत के प्रभाव से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रत करने वालो के सभी पापों का नाश भी होता है और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

पूरे दिन रहेगा अमृतसिद्धि योग
मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। मोक्षदा एकादशी का अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी। आज एकादशी तिथि में सूर्योदय हुआ है और ये तिथि रात तकरीबन 11.36 तक रहेगी। साथ ही पूरे दिन सुबह अमृतसिद्धि योग भी रहेगा।

ऊनी कपड़ों और अन्न दान का महत्व
मोक्षदा एकादशी के साथ अमृतसिद्धि शुभ योग में किया गया दान कई तरह के पापों से मुक्ति दिलाकर पुण्य प्रदान करने वाला रहेगा। साथ ही मन की इच्छाओं की पूर्ति के लिए पुण्य प्रदान करने वाला रहेगा। आज एकादशी पर्व पर कंबल, ऊनी कपड़े, गुड़, तिल, तिल का तेल व जलाऊ लकड़ी का दान करने से कई तरह के रोगों से छुटकारा मिलता है। साथ ही समृद्धि, यश, वैभव और विजय की प्राप्ति होती है।

आज गीता जयंती पर्व
मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाया जाता है। द्वापर युग में इसी तिथि पर भगवान कृष्ण ने महाभारत में अर्जुन को भगवत गीता का उपदेश दिया था। माना जाता है कि इस दिन उपवास रखने और भगवान कृष्ण की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को स्वर्ग तक पहुंचने में मदद मिलती है। मोक्षदा एकादशी की तुलना चिंतामणि से की जाती है, जिसके बारे में माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

श्रद्धा अनुसार पाठ करें
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश का कहना है कि इस पर्व पर विद्यार्थियों को श्रीमदभगवत गीता का यथाशक्ति और सामर्थ्य के अनुसार पाठ करना चाहिए। इससे स्मृति शक्ति तेज होती है और विद्या क्षेत्र में सफलता मिलती है। घर में कोई रोगी हो या किसी भी तरह का तनाव हो तो मन: स्थित बदलने के लिए इस दिन भगवान विष्णु का पूजन कर घर में श्रीमदभगवत गीता का पाठ जरूर करना चाहिए।

राशि अनुसार क्या दान करें...
मेष:
लाल कम्बल व गुड़ चने के दाने
वृष: तिल व चावल
मिथुन: काले कम्बल सहित उड़द की दाल
कर्क: रजाई व कम्बल के कवर या सफेद तकिया
सिंह: तिल्ली का तेल व घी, गुड़
कन्या: गुड़ व देशी चने
तुला: मफलर, ऊनी टोपी व मौजे
वृश्चिक: सरसो का तेल, चने की दाल
धनु: आसन, रजाई, दरी, चादर, तकिया
मकर: लोहे का दान (चूल्हा या सिगड़ी ) कंबल, जलाऊ लकड़ी, पादुका, कपड़े के जूते
कुंभ: सरसो का तेल, कोयला, स्वेटर, शाल, ऊनी टोपी, मफलर
मीन: दरी, शाल, जलाऊ लकड़ी।

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