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  • Auspicious Coincidence On Sarvapitru Amavasya: Shraddha In Budhaditya, Sarvarthasiddhi, Amritsiddhi, And Lakshmi Narayan Yoga Will Satisfy The Ancestors For The Whole Year

सर्वपितृ अमावस्या पर शुभ संयोग:बुधादित्य, सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि और लक्ष्मीनारायण योग में श्राद्ध करने से सालभर के लिए तृप्त होंगे पितर

7 दिन पहले
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अश्विन महीने के रविवार को सर्वपितृ अमावस्या है। इस पर्व पर तिथि, वार, ग्रह, नक्षत्रों से मिलकर सात शुभ योग बन रहे हैं। जिससे ये महापर्व बन जाएगा। इस शुभ संयोग में स्नान, दान और श्राद्ध करने से कई गुना शुभ फल मिलेगा।

ग्रंथों में कहा गया है कि ऐसा इस दिन पितरों की संतुष्टि के लिए पेड़-पौधे भी लगाने चाहिए। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए अमावस्या को पितृमोक्ष भी कहते हैं। पंडितों का कहना है कि अश्विन महीने की इस अमावस्या पर पूजन करने से पितृ सालभर के लिए तृप्त भी हो जाते हैं।

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि इस पितृ पर्व पर तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर शुभ, शुक्ल, मित्र, सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग बनेंगे। वहीं, सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य और बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग बनेगा। इन सभी योगों से बन रहे शुभ संयोग में किए गए शुभ कामों और पूजा-पाठ से मिलने वाला पुण्य फल पितरों को मिलता है।

गाय को घास, कुत्तों और कौओं को रोटी खिलाएं
बुधवार को सूरज उगने से पहले नहा लें। इसके बाद पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पूजा-पाठ करें। गाय के घी का दीपक लगाएं। श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प लें। इसके बाद गाय को हरी घास खिलाएं, कुत्तों और कौओं को रोटी खिलाएं। अमावस्या पर महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के नाम का जाप करें। अमावस्या के दौरान ब्राह्मण भोजन करवा सकते हैं। संभव न हो तो किसी मंदिर में आटा, घी, दक्षिणा, कपड़े या अन्य जरूरी चीजें दान करें।

जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें
डॉ. मिश्र का कहना है कि पितृमोक्ष अमावस्या पर दान-पुण्य का बहुत महत्व होता है। इस पर्व पर घर में पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें। किसी गौशाला में घास या धन का दान करें। माना जाता है कि इस दिन दिए गए दान का कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है। इस दिन गाय को घास भी खिलाना चाहिए।

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