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  • Bath donation And Pitru Festival: On Ashadh Amavasya, Shradh On Tuesday And Bath donation On Wednesday Will Give Virtue, Peepal Worship Will Reduce Shani Dosha.

स्नान-दान और पितरों का पर्व:आषाढ़ अमावस्या पर मंगलवार को श्राद्ध और बुधवार को स्नान-दान से मिलेगा पुण्य, पीपल पूजा से शनि दोष में आएगी कमी

5 महीने पहले
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आषाढ़ महीने की अमावस्या 28 और 29 जून को है। इनमें मंगलवार को व्रत, पूजा और श्राद्ध किया जाएगा। वहीं, बुधवार को स्नान-दान करने का महत्व रहेगा। ग्रंथों के मुताबिक इस पर्व पर गंगा स्नान, दान और पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करने से कई यज्ञों का पुण्य मिलता है। ये अमावस्या वर्षा ऋतु के पहले आती है। इस दिन हल और खेती के अन्य उपकरणों की पूजा करने की भी परंपरा है। इसलिए इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है।

मंगलवार और बुधवार को अमावस्या होना शुभ
ज्योतिष का कहना है कि अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आ जाते हैं। इन दोनों के ग्रहों के बीच का अंतर 0 डिग्री हो जाता है। इस दिन सूर्य-चंद्रमा की युति बनती है। ज्योतिष ग्रंथों में सूर्य को धर्म-कर्म का स्वामी बताया गया है और चंद्रमा को अमृत और मन का। इसलिए इस दिन किए गए धार्मिक कामों से आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है।

मंगलवार और बुधवार को पड़ने वाली अमावस्या आमतौर पर शुभ मानी गई है। क्योंकि इन दिनों के संयोग में किए गए पुण्य कर्मों का फल और बढ़ जाता है। वहीं, रविवार को अमावस्या का होना अशुभ होता है।

शनि और केतु की जन्म तिथि
ज्योतिष ग्रंथों में अमावस्या को शनिदेव के साथ ही केतु की जन्म तिथि भी माना गया है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विधान है। मंगलवार को अमावस्या तिथि में सुबह जल्दी उठकर पानी में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाएं। इसके बाद तिल के तेल का ही दीपक पेड़ के नीचे लगाएं। फिर पिप्पलाद मुनि और शनिदेव को प्रणाम करें। इसके बाद पेड़ की परिक्रमा करें। ऐसा करने से शनिदेव और केतु के अशुभ असर में कमी आ जाती है।

इस पर्व पर क्या करें
आषाढ़ महीने की अमावस्या पर तीर्थ या किसी पवित्र नदी के जल से नहाना चाहिए। इसके बाद श्रद्धा के मुताबिक दान करने का संकल्प लें। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। अमावस्या पर पेड़-पौधे भी लगाए जाते हैं। ऐसा करने से कई तरह के दोष और जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही कई इस पर्व पर ब्राह्मण भोजन करवाने का विधान बताया गया है। साथ ही गाय, कुत्ते और कौवे को रोटी खिलाने से भी पितर खुश होते हैं।

राशि अनुसार दान करने का महत्व
मेष: लाल कपड़े, गेहूं और तिल का दान करना शुभ रहेगा।
वृष: सूती कपड़ों का दान करें। जल, दूध और सफेद तिल का दान करना चाहिए।
मिथुन: गाय को हरी घास खिलाएं। श्रद्धा अनुसार गणेश मंदिर में दान करें।
कर्क: गंगाजल, दूध से बनी मिठाइयां और सफेद कपड़ों का दान करें।
सिंह: लाल कपड़े, कंबल या चादर का दान करें।
कन्या: हरे मूंग, धान, कांसे के बर्तन या हरे कपड़ों का दान करें।
तुला: किसी मंदिर में फल, रुई या घी का दान करें।
वृश्चिक: लाल वस्त्र, सोना, तांबा, केसर, कस्तूरी का दान करना चाहिए।
धनु: मंदिर में हल्दी, चने की दाल का दान करें।
मकर: कंबल और काले तिल का दान करें।
कुंभ: तेल, तिल, नीले-काले कपड़े, ऊनी कपड़े और लोहे का दान करें।
मीन: पीली चीजें, धर्मग्रंथ, शहद, दूध देने वाली गाय, पीला चंदन, पीले कपड़े दान कर सकते हैं।

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