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उत्सव:अमावस्या पर पितरों के लिए करें धूप-ध्यान, गौशाला में और जरूरतमंद लोगों को दान जरूर करें

15 दिन पहले
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सोमवार और मंगलवार को भाद्रपद अमावस्या है। सोमवार को श्राद्ध की अमावस्या है और मंगलवार को स्नान-दान की। इसे कुशग्रहिणी अमावस्या भी कहते हैं। जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार अमावस्या पर पितरों के लिए धूप-ध्यान जरूर करना चाहिए। इसके लिए दोपहर का समय सबसे अच्छा रहता है। दोपहर में गाय के गोबर से बना उपला यानी कंडा जलाएं और जब कंडे से धुआं निकलना बंद जाए, तब कंडे के अंगारे पर गुड़ और घी से धूप देना चाहिए। इस दौरान पितरों का ध्यान करते रहना चाहिए। धूप देने के बाद हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को जल अर्पित करें। ये धूप देने की सामान्य विधि है।

अमावस्या पर नदियों में स्नान करने की भी परंपरा है। अगर नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही सभी तीर्थों का और नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी घर पर ही तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है। स्नान के बाद घर के आसपास अगर कोई जरूरतमंद व्यक्ति दिखे तो उसे धन, वस्त्र और अनाज का दान जरूर करें। किसी गौशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए अपनी शक्ति के अनुसार दान करना चाहिए।

शिवलिंग पर तांबे के लोटे से चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। चांदी के लोटे से कच्चा दूध भगवान को अर्पित करें। इसके बाद फिर से शुद्ध जल चढ़ाएं। शिवलिंग का श्रृंगार करें। तिलक लगाएं, बिल्व पत्र, धतूरा, फल-फूल चढ़ाएं। भगवान को मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

अमावस्या सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल जरूर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। कुंडली में सूर्य से संबंधित दोष हों तो गुड़ का दान करें। इस तिथि पर चंद्र देव की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को दूध का दान करना चाहिए। शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर सों सोमाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।