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राजा भर्तृहरि की नीतियां:गुप्त दान करना, मेहमानों का स्वागत करना और मदद करके चुप रहना, अच्छे लोगों के लक्षण हैं

एक महीने पहले
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  • राजा विक्रमादित्य के भाई थे भर्तृहरि, इन्होंने की थी नीति शतकम् की रचना

पुराने समय में उज्जैन के एक राजा था भर्तृहरि। इनके छोटे भाई का नाम विक्रमादित्य था। विक्रमादित्य के नाम से हिन्दी पंचांग यानी विक्रम संवत् प्रचलित है। मान्यता है कि कि राजा भर्तृहरि की पत्नी पिंगला ने उन्हें धोखा दिया था। इस वजह से भर्तृहरि ने राजपाठ छोड़ दिया और विक्रमादित्य को राजा बना दिया था। इसके बाद भर्तृहरि ने तपस्या की थी। भर्तृहरि ने नीति शतकम्, वैराग्य शतकम्, श्रृंगारशतक नाम के ग्रंथों की रचना की थी। नीति शतकम् में जीवन को सुखी और सफल बनाने के सूत्र बताए गए हैं। जानिए नीति शतक की कुछ खास नीतियां...

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